: शक्ति की उपासना का पर्व है नवरात्रि – अरविन्द तिवारी
Wed, Mar 22, 2023
बिलासपुर – आज से चैत्र नवरात्रि के साथ ही हिन्दुओं का नवसंवत्सर भी शुरू हो रहा है। ब्रह्म पुराण के अनुसार चैत्र प्रतिपदा से ही ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। सनातन धर्म में शक्ति की देवी माता दुर्गा की पूजा का विशेष महत्व है। इसी के चलते साल में दो प्रकट (चैत्र , आश्विन) नवरात्रि और दो गुप्त (आषाढ़ , माघ) नवरात्रि पर्व मनाये जाते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों को बेहद पवित्र माना जाता है। इस दौरान लोग देवी के अलग अलग नौ रूपों मां शैलपुत्री , ब्रह्मचारिणी , चंद्रघंटा , कुष्मांडा , स्कंदमाता , कात्यायनी , कालरात्रि , महागौरी और सिद्धिदात्रि की पूजा-अर्चना , आराधना कर उनसे सुख , समृद्धि की आशीर्वाद मांँगते हैं। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये अरविन्द तिवारी ने बताया कि शक्ति उपासना के पर्व नवरात्रि में माता दुर्गा नौ दिनों के लिये पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों की साधना से प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद प्रदान करती हैं। नवरात्रि के पहले तीन दिन देवी दुर्गा के ऊर्जा और शक्ति की उपासना का महत्व होता है। फिर नवरात्रि के चौथे , पांचवें और छठे दिन पर सुख और समृद्धि प्रदान करने वाले देवी लक्ष्मी , सातवें दिन कला और ज्ञान की देवी सरस्वती की उपासना होती है। अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन कर माता की विदाई की जाती है। नवरात्रि में विधिपूर्वक पूजा करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। चैत्र नवरात्रि में मां की पूजा करने से जीवन में आने वाली परेशानियों से मुक्ति मिलती है वहीं सुख , समृद्धि और जीवन में शांति बनी रहती है। नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा में तीन चीजों का विशेष महत्व है इसलिये इन तीन चीजों के बारे में विशेष ध्यान रखना चाहिये क्योंकि नवरात्रि में इन तीन चीजों के बिना मांँ दुर्गा की पूजा अधूरी मानी जाती है। मांँ की पूजा में लाल रंग का विशेष महत्व है. नवरात्रि की पूजा में इस रंग सर्वाधिक प्रयोग होता है. क्योंकि मां दुर्गा को लाल रंग अधिक पसंद है। इसलिये घटस्थापना और माता स्थापित करने के लिये लाल रंग के वस्त्र से आसन सजाया जाता है. इसके साथ ही लाल चुनरी और कुमकुम का टीका लगाया जाता है। नवरात्रि का पूजन आरंभ करने से पूर्व मां दुर्गा को लाल रंग की चुनरी चढ़ाई जाती है. ध्यान देने वाली बात ये है कि मां दुर्गा को कभी भी रिक्त चुनरी नहीं चढ़ानी चाहिये ,चुनरी के साथ सिंदूर यानि श्रृंगार की सामाग्री , मेवा, फल, मिष्ठान, नारियल आदि भी चढ़ाने चाहिये। इसी तरह नवरात्रि में अखंड ज्योति का विशेष महत्व है , अखंड ज्योति से घर में सकरात्मक ऊर्जा आती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होती है। अखंड ज्योति को जलाने से पूर्व स्वच्छता का पूर्ण ध्यान रखा जाना चाहिये , ज्योति जलाने के लिये पीतल या मिट्टी के बने दीपक का प्रयोग करना चाहिये गाय के घी से इस अखंड ज्योति को जलाया जाता है। अखंड ज्योति जलाने के बाद घर को खाली नहीं छोड़ा जाता है। इन नौ दिनों में रोजाना देवी मां को सिर्फ सात्विक चीजों का ही भोग लगाना चाहिये। साथ ही देवी मां को लाल रंग के पुष्प अर्पित करना शुभ माना गया है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार यह चैत्र नवरात्रि की शुरुआत पंचक काल में आज 22 मार्च से हो रही है और 30 मार्च को इसका समापन होगा। इस दौरान जहां माता नाव पर सवार होकर आयेगी वहीं डोली से माता की विदाई होगी। आज चैत्र नवरात्रि की शुरुआत शुभ संयोग में हो रही है। इस दिन गजकेसरी योग , बुधादित्य योग , हंस योग , शश योग , धर्मात्मा और राज लक्षण योग बने हैं। इस बार देवी दुर्गा नौका पर सवार होकर अपने भक्तों के घर आयेंगी और उनके समस्त कष्टों का अंत करेंगी। बता दें कि नौका पर देवी का आगमन भक्त के जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आता है। इनका प्रस्थान डोली पर होगा जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है। इस बार मां जगत जननी नौका पर सवार होकर आना इस बात का संकेत देता है कि आने वाले दिनों में सभी का कल्याण होगा। इस बार चैत्र नवरात्रि के अवसर पर एक महासंयोग भी बन रहा है। ये नवरात्रि पूरे 09 दिन के होंगे यानि चैत्र नवरात्रि के तिथियों में कोई घट-बढ़ नहीं हो रहा है , जो अपने आप में इस नवरात्रि को खास बनाता है।आज होगी शैलपुत्री की आराधनानवरात्रि से जुड़े कई रीति-रिवाजों के साथ कलश स्थापना का विशेष महत्व है। नवरात्रि की शुरुआत घट स्थापना के साथ ही होती है जिसे कलश स्थापना भी कहा जाता है जो शक्ति की देवी का आह्वान है। आज नवरात्रि के पहले दिन माँ दुर्गा की पूजा आराधना “शैलपुत्री” के रूप में होगी। पर्वतराज हिमालय के घर में पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा। इनका रुप सौम्य और शांत है , सफेद वस्त्र धारण की हुई इन देवी के चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती है। माना जाता है कि देवी शैलपुत्री की आराधना करने से तामसिक तत्वों से मुक्ति मिलती है। माता शैलपुत्री का नाम लेने से घर में पवित्रता आती है। शैलपुत्री नंदी नाम के वृषभ पर सवार होती हैं और इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बायें हाथ में कमल का पुष्प है। यह त्रिशूल जहां भक्तों को अभयदान देता है, वहीं पापियों का विनाश करता है। बायें हाथ में सुशोभित कमल का पुष्प ज्ञान और शांति का प्रतीक है। मां को सफेद वस्तु अतिप्रिय है। नवरात्र के पहले दिन मां को सफेद वस्त्र और सफेद फूल और सफेद भोग चढ़ाने के साथ ही सफेद बर्फी का भी भोग लगाना चाहिये। मां के इस पहले स्वरूप को जीवन में स्थिरता और दृढ़ता का प्रतीक माना जाता है। शैल का अर्थ होता है पत्थर और पत्थर को दृढ़ता की प्रतीक माना जाता है। मां शैलपुत्री के चरणों में गाय का घी अर्पित करने से भक्तों को आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है और उनका मन एवं शरीर दोनों ही निरोगी रहता है। इनकी उपासना से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
: कांग्रेसी नेता फूलदास महंत की मांगों पर बालको प्रबंधन की बनी सहमति
Wed, Mar 22, 2023
कोरबा जिले के उपनगरीय क्षेत्र बाल्को के लाल घाट निवासी कांग्रेसी नेता फुल दास महंत (जिला महामंत्री, कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग (शहर), कोरबा) द्वारा रखी गई मांगो को बालको प्रबंधन द्वारा सहमति प्राप्त हुई है। इस विषय की जानकारी देते हुए फूलदास महंत ने बताया कि उनके द्वारा बालको प्रबंधन के समक्ष महत्वपूर्ण विषयों को लेकर अपनी कुछ मांगे रखी थी जैसे कि :-
स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार की मांग। स्थानीय व्यवसायियों से सामान की खरीदी की मांग। बालको संयंत्र में बतौर ठेका श्रमिक काम करने वाले मजदूरों के परिवार को मृत्यु उपरांत तत्काल मुआवजा व अनुकंपा नियुक्ति की मांग। बाल्को परसा भाटा से रिंग रोड तक सड़क मार्ग के चौड़ीकरण की मांग। रिश्दा चौक में टावर लाइट की व्यवस्था। बालको अस्पताल में स्थानीय गरीब परिवार के नि:शुल्क इलाज की मांग। बाल्को क्षेत्र में सभी गोद लिए वार्डों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व आंगनबाड़ी केंद्र के स्थापना की मांग, ताकि गरीब परिवारों को उनके घरों के समीप ही नि:शुल्क जांच व इलाज की सुविधा प्राप्त हो सके। तथा बालको क्षेत्र में छोटे बड़े समस्त ठेकेदारों को काम दिलाने इत्यादि की महत्वपूर्ण मांग रखी गई जिसमें बालको प्रबंधन के द्वारा उनकी समस्त मांगों पर सहमति प्राप्त हो गई है तथा शीघ्र ही उनकी मांगों पर बालको प्रबंधन के द्वारा कार्य किए जाएंगे।
तो वही फूलदास महंत ने बालको प्रबंधन को यह भी चेतावनी दी है कि आने वाले समय में यदि बालको प्रबंधन उनकी मांगों को धरातल तक नहीं पहुंचाता है तो उनके द्वारा उग्र जन आंदोलन की जाएगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी बाल्को प्रबंधन की होगी।
: चौखट में फन फैलाए घंटो बैठा रहा कोबरा, जान बचाने के लिए परिवार वाले बंधक की तरह बैठे रहे ऊपर
Tue, Mar 21, 2023
छत्तीसगढ़ में अचानक से मौसम बदलने से पूरा माहौल बदल गया हैं जहां इस वक्त तपती धूप हुआ करती हैं वहीं अचानक बारिश होने से कोहरे के साथ ठंड लगने लगी हैं वहीं इसका असर कोरबा जिले में भी काफी असर देखने को मिल रहा जिले में आसनक से बीती रात में झमा झम बारिश होने से लोगों की मुसिबत बढ़ गई बारिश के कुछ देर बाद ही एक परिवार कई घंटो तक बंधक बन कर एक कमरे में बैठा रहा जी हा मामला हैं कोरबा के दादर खुर्द का जहां ज़मीन में रेंगने वाली मौत कोबरा सांप अचानक से एक छोटे से कमरे में घूस गया वहीं परिवार की महिला खाना बनाने की तैयारी कर रही थीं जब अचानक से कोबरा पर नज़र पड़ी तो परिवार की जान अटक गई और डरे सहमे पूरा परिवार भाग कर एक किनारे बने पठार पर बैठ गया और सांप से जाने की प्रार्थना करने लगें पर वह कोबरा चौखट पर ही फन फैलाए बैठ गया मानो परिवार वालों को बंधक बना लिया हो, किसी तरह मदद के लिए बगल वालों को इसकी जानकारी दी जिसके पश्चात पड़ोसी हर्षल पटेल ने इसकी जानकारी स्नेक रेस्क्यू टीम प्रमुख वन विभाग सदस्य जितेन्द्र सारथी को दिया और बताया साप एक किराने बैठ गया हैं और परिवार वाले अन्दर फस चुके हैं, जितेंद्र सारथी ने हल्की हल्की बारिश होने की वजह से थोड़ी देर में पहुंचने की बात कहीं आखिरकार एक घण्टे के पश्चात जितेन्द्र सारथी मौके पर पहुंचे और कमरे में प्रवेश किया जिसको देख बंधक बनी महिला फूट फूट कर रोने लगीं और बचा लेने की गुहार लगाने लगी फ़िर सारथी ने उनको समझाया तब जाकर उनका डर कम हुआ जिस वक्त कमरे में रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा था वही बाहर लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई थीं फिर सुरक्षित तरीके से उसे डिब्बे में बंद किया और और परिवार को निचे आने को बोला गया, एक घंटो दहशत में रही महिला सरस्वती यादव ने पुरी आप बीती बताई और बार बार नम आशु के साथ कहने लगीं " *हमर आज जान बचा लेंहे बेटा* "फिर सभी ने राहत भरी सास ली और जितेंद्र सारथी का धन्यवाद ज्ञापित किया थोड़ी देर पश्चात फिर उसे जंगल में छोड़ दिया गया।*यादव परिवार सुबह ही आए थे किराए में रात को खाली कर दिए।*
सरस्वती यादव का परिवार कहीं बाहर से कमाने खाने के लिए कोरबा आए थे जो की सुबह ही दादरखुर्द में मकान लेकर सुबह ही किराए में रहने लगे थे पर उन्हें क्या मालूम था उनका सामना कोबरा साप से ऐसे सामना होगा, एक घण्टे के दहशत भरे पल ने उनके दिमाग़ में इतना डर भर दिया की साप के रेस्क्यू के कुछ मिनटों बाद ही घर को ख़ाली कर दिया और अपने दामाद के घर चले गए।*जितेन्द्र सारथी ने समस्त प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया से विशेष रूप से निवेदन किया गया है की रेस्क्यू हेल्प लाइन नंबर 8817534455,7999622151 को प्रकाशित करे, देखा गया हैं की अभी भी बहुत लोगों के पास हमारा नंबर नहीं होने की वजह से लोग यहां वहा नंबर मांगते रहते हैं जिसकी वजह से लोग लगातार परेशान होते रहते हैं।*