: मौत के मुकाबले में अमोरा के लाल ने मारी बाजी
Mon, Oct 10, 2022
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टरायपुर - छत्तीसगढ़ के इतिहास में भारत का सबसे बड़ा रेसलिंग महासंग्राम पहली बार राजधानी के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में युनिक वार नाम के प्रो रेसलिंग टूर्नामेंट का आयोजन किया गया , जिसमें देश-विदेश के अठारह नामी फाइटरों की फाइट खेल प्रेमियों को देखने को मिला। इस मैच की खासियत ये रही कि यह मैच नो रूल्स के अंतर्गत खेला गया यानि प्रो- रेसलिंग से जुड़े कोई भी नियम इस मैच में लागू नहीं थे। इस फाइट में दर्शकों को टेबल , चेयर , ट्यूबलाईट , हॉकी ,डन्डे जैसे प्राप्स का इस्तेमाल देखने को मिला। इस मौत के मुकाबले में छत्तीसगढ़ के एकमात्र रेसलर जांजगीर चांपा ( अमोरा - महंत) निवासी द लायन प्रतीक तिवारी ने भी भाग लिया , जिनका मुकाबला नेपाल के प्रोफेशनल रेसलर अमित ऐस्सनसन से हुआ। बता दें अमित ऐस्सनसन टैग टीम चैंम्पियन है। ये दंगल शो में बैंगलोर , राजस्थान , वाराणसी , मथुरा , छतरपुर , नोएडा के अलावा थाईलैण्ड में भी अपनी जलवा दिखा चुके हैं। उल्लेखनीय है कि यह मुकाबला एक मैच ना होकर दो रेसलरों के बीच जिंदगी की जंग भी थी , जिसमें अपनी जीत दर्ज करने के लिये सभी रेसलर हर चुनौती को स्वीकार करने को तैयार थे। कई इंटरनेशनल फाइटरों को धूल चटाने वाले प्रतीक ने आखिरकार इस मुकाबले में भी अपनी जीत दर्ज कर अपने जिला और प्रदेश का नाम रोशन किया है।
गृह जिला में हुआ भव्य स्वागतमौत के मुकाबले में जीत हासिल करने के आज देर शाम प्रतीक तिवारी सड़क मार्ग से होते हुये जाज्वल्य नगरी जांजगीर और यहां शारदा चौक से रोड शो करते हुये कचहरी चौक पहुंचे। जहां उन्होंने बाडी प्रदर्शन कर अपने साथ हुये मुकाबले के अनुभव और जीत पर प्रकाश डाला। स्वागत समारोह के अंत में उन्होंने उपस्थित गणमान्य नागरिकों और प्रशंसकों का आभार व्यक्त करते हुये अपनी जीत का श्रेय जांजगीर सहित पूरे छत्तीसगढ़ को दिया। इस सम्मान समारोह को आयोजित करने में आनंद तिवारी ,समीर द्विवेदी , शिशिर शर्मा , पंकज पांडेय , राज मिश्रा , सुनील साहू , राजू साहू सहित सभी विशिष्ट मित्रों का उल्लेखनीय योगदान रहा। यहां स्वागत पश्चात उनका काफिला खुली जीप में अपने निवास के लिये रवाना हुआ। जहां उनके प्रशंसकों ने पुनः आतिशबाजी कर उनका स्वागत किया। गृहप्रवेश करने पर उनकी मां मंजू तिवारी और धर्मपत्नी गरिमा तिवारी ने तिलक लगाकर और आरती करके स्वागत किया। यहां प्रतीक ने अपनी मां को तिरंगा सौंपा , तत्पश्चात मुहल्लावासियों ने एक साथ घर पहुंचकर गुलदस्ता देकर उनका स्वागत किया।पहला और अंतिम लक्ष्य रेसलिंग - प्रतीकअपने निवास पर पत्रकारों से चर्चा करते हुये प्रतीक ने बताया कि उनके पिता रामगुलाम तिवारी खली के बड़े फैन हैं। मैंने जब से होश संभाला एंटरटेनमेंट के नाम पर उन्हें टीवी पर फाइट देखते ही पाया। मन ही मन मैंने तय कर लिया था कि रेसलर ही बनना है। तेरह साल की उम्र में घर पर ही जिम बनाकर एक्सरसाइज करने लगा। मेरी लगन देखकर पैरेंट्स भी खली के पास ट्रेनिंग के लिये भेजने राजी हो गये। प्रतीक ने अपने लक्ष्य के बारे में पूछे जाने पर बताया कि उनका पहला और अंतिम लक्ष्य रेसलिंग ही है। वे अपनी प्रतिभा को लोगों के सामने लाना चाहते हैं ताकि दूसरे को प्रेरणा मिल सके।कौन है प्रतीक तिवारीरेसलर की दुनियाँ में द लायन के नाम से सुप्रसिद्ध रेसलर प्रतीक तिवारी (26 वर्षीय) जांजगीर चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम अमोरा ( महंत) निवासी श्रीमति मंजू रामगुलाम तिवारी के इकलौते सुपुत्र हैं। बारहवीं तक की शिक्षा अपने गांव में ही पूरी करने के बाद इन्होंने ग्रेजुएशन किया है। प्रतीक को बचपन से ही रेसलिंग देखने और वैसा ही बनने का शौक उनके पिताजी को था। जिसके बाद उन्होंने अपने इकलौते बेटे को रेसलिंग में भेजने का ठान लिया और द ग्रेट खली के पास प्रशिक्षण के लिये पंजाब भेजा। तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद ट्रेनिंग लेकर प्रतीक अब तक दो सौ से अधिक रेसलिंग में हिस्सा ले चुका है। कई चैंपियनशिप बेल्ट हासिल करने के बाद प्रतीक इस बार अपने गृह राज्य की राजधानी में आयोजित प्रो रेसलिंग में भी अपना जलवा बरकरार रखा।
: नील मैदान, एसईसीएल विजयादशमी उत्सव में नेता-प्रतिपक्ष हितानंद रहें मुख्य अतिथि
Mon, Oct 10, 2022
कोरबा :- नेता प्रतिपक्ष हितानंद अग्रवाल कोरबा में वार्ड क्रमांक 25 नील मैदान एसईसीएल सुभाष ब्लॉक में दशहरा पर्व में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए |नेता प्रतिपक्ष हितानंद अग्रवाल ने कहा कि विजयदशमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योंहार है, आश्विन शुक्ल दशमी को विजयदशमी का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, यह पर्व भारतीय संस्कृति के वीरता का पूजक, शौर्य का उपासक हैं, व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। भगवान प्रभु श्रीराम ने इसी दिन रावण का वध किया था, इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है, इसीलिए इस दशमी को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा। इसी दिन लोग नया कार्य प्रारम्भ करते हैं, शस्त्र-पूजा की जाती है, प्राचीन काल में राजा इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी जैसे अवगुणों को छोड़ने की प्रेरणा हमें देता है।श्री अग्रवाल ने कहा कि विजयादशमी नवरात्रि के बाद दसवें दिन मनाया जाता है। इस दिन राम ने रावण का वध किया था। रावण भगवान राम की पत्नी देवी सीता का अपहरण कर लंका ले गया था। भगवान राम युद्ध की देवी मां दुर्गा के भक्त थे, उन्होंने युद्ध के दौरान पहले नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा की और दसवें दिन दुष्ट रावण का वध किया। इसलिए विजयादशमी एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। राम की विजय के प्रतीक स्वरूप इस पर्व को 'विजयादशमी' कहा जाता है।इस दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष गणेश कुलदीप, वार्ड 25 के पार्षद शैलेंद्र सिंह, बीसीसी न्यूज की संपादक निशिता झा, भाजपा नेत्री अंजू सिंह, युवा भाजपा नेता बद्री अग्रवाल, समिति के संरक्षक कर्मेंद्र सिंह, अध्यक्ष रौनित कुलदीप, उपाध्यक्ष गोलू टंडन, सचिव गजेंद्र कश्यप, कोषाध्यक्ष गोपी सिंह सहित बड़ी में प्रबुद्धजन उपस्थित रहें |
: बालको ने त्यौहारों पर आय सृजन हेतु 300 महिलाओं को किया प्रशिक्षित
Mon, Oct 10, 2022
बालकोनगर, 10 अक्टूबर 2022। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी (बालको) ने त्यौहारों का उत्साह बढ़ाने के लिए स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) हेतु नई पहल की है। कंपनी के उन्नति परियोजना के अंतर्गत प्रशिक्षिण के माध्यम से एसएचजी सदस्यों हेतु विभिन्न उत्पाद बनाने का कार्यक्रम शुरू किया गया है। कार्यशालाओं के माध्यम से बालको प्रतिभागियों को अपने लिए राजस्व और आय सृजन के लिए अतिरिक्त स्त्रोत बनाने में मदद कर रहा है। त्यौहारों के उमंग एवं उत्साह को बढ़ावा मिल रहा है।
बालको ने रक्षा बंधन त्यौहार के दौरान अपने सामुदायिक परियोजना 'उन्नति' के तत्वावधान में आयोजित प्रशिक्षण कार्यशालाओं की शुरुआत की थी। त्यौहार से पहले सदस्यों ने हस्तनिर्मित राखियां बनाई और बेचीं। वहीं गणेश चतुर्थी त्यौहार पर नर्मदा नदी से निकाली गई पवित्र मिट्टी और गंगा नदी के पानी से भगवान गणेश की पर्यावरण अनुकूल मूर्तियां बनाईं। नई पहल होने के बावजूद एसएचजी सदस्यों ने गणेश की अधिकांश मूर्तियों को बेचने में सफलता हासिल की जो उनकी मेहनत एवं गुणवत्ता को दर्शाता है।
दिवाली त्यौहार के मद्देनजर एसएचजी सदस्यों ने स्थानीय महिलाओं के विविध हितों को ध्यान में रखते हुए कई प्रशिक्षण सत्रों की पेशकश की है। वर्तमान संचालित कार्यशाला 'कला प्रशिक्षण' और 'हस्तनिर्मित चॉकलेट' सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को बुनियादी ड्राइंग एवं पेंटिंग कौशल और स्वादिष्ट चॉकलेट बनाने की विधि सिखाई जा रही है। इसके अलावा 'छत्तीसा' पहल की शुरूआत की है जिसमें पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाना सिखाया जा रहा है। कार्यशाला की मदद से अब तक 300 से ज्यादा एसएचजी सदस्यों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक अभिजीत पति ने कहा कि हम समाज की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। स्थानीय महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें अनेक अवसर बालको की परियोजना उन्नति के जरिए उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं स्वयं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएं। इससे उन्हें समाज में अपनी स्वतंत्र पहचान स्थापित करने में मदद मिलेगी। श्री पति ने कहा कि महिलाएं अपने परिवार, समाज और देश को बुलंदियों पर लेकर जाने में अपना योगदान दें। बालको प्रबंधन महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कटिबद्ध है।
स्वयंसेवी संगठन जीपीआर स्ट्रैटेजीज एंड सोल्यूशंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री रेक्स मेहता कहते हैं कि बालको सामुदायिक विकास के चहुंमुखी प्रयासों के अंतर्गत उन्नति परियोजना सफलता का एक उदाहरण है। उन्नति परियोजना के अंतर्गत महिला सबलीकरण के उद्देश्य से आर्थिक समावेशन एवं स्वावलंबन, समूह तथा सामाजिक सुदृढ़ीकरण के आधार स्तंभों को लक्षित किया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाओं की रचनात्मक भागीदारी से यह परियोजना नई ऊंचाइयों को छूएगी।
लाभार्थी धनेश्वरी गोस्वामी ने बताया कि चॉकलेट बनाने का अनुभव वाकई में बहुत अच्छा था। हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि जो चॉकलेट बाजार से खरीदते हैं उसे घर पर भी बनाया जा सकता है। प्रशिक्षण से हम चॉकलेट बनाना सीख गए और जिसे बाजार में बेचकर अपनी आय बढ़ाने में मदद मिली है।
परियोजना उन्नति के जरिए महिलाओं को अनेक गतिविधियों से जोड़ा गया है जिससे उन्हें आजीविका प्राप्त करने और खुद के पैरों पर खड़े होने में मदद मिली है। वर्तमान में कोरबा के 45 शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 458 स्वयं सहायता समूहों की लगभग 5066 महिलाओं को विभिन्न कार्यक्रमों से लाभ मिल रहा है। परियोजना के अंतर्गत महिला स्वयं सहायता समूहों के फेडरेशन विकास की दिशा में कार्य जारी है। महिलाओं को क्षमता निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, सूक्ष्म उद्यमों के प्रचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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