: बालको मेडिकल सेंटर ने विश्व स्तरीय कैंसर उपचार से क्षेत्र को बनाया सशक्त
Mon, Sep 23, 2024
_ईकैंसर, टाटा मेमोरियल सेंटर और नेशनल कैंसर ग्रिड के साथ साझेदारी कर बीएमसी ने कैंसर उपचार को किफायती तथा सभी तक इसकी पहुंच को बनाया आसान।_*रायपुर, 21 सितंबर 2024।* वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन के अतंर्गत संचालित बालको मेडिकल सेंटर द्वारा आयोजित छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव का दूसरा संस्करण समापन की ओर। 20 से 22 सितम्बर तक आयोजित कॉन्क्लेव में कैंसर उपचार के दौरान आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए कैंसर क्षेत्र के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल हुए जिसमें लंदन, कनाडा, न्यूजीलैंड, इजरायल, अमेरिका और स्पेन के ख्याति प्राप्त संकाय सदस्य के साथ भारत के शीर्ष कैंसर संस्थानों के प्रमुख विशेषज्ञ मौजूद थे। कॉन्क्लेव ने ज्ञान साझा करने, विचार-मंथन और नेटवर्किंग के लिए एक मंच प्रदान किया।
कॉन्क्लेव का थीम "कॉमन सेंस ऑन्कोलॉजी (सीएसओ) फॉर आउटकम्स दैट मैटर" विषय पर केंद्रित था। यह वैश्विक ऑन्कोलॉजी समुदाय में एक बढ़ता हुआ अभियान है जो कैंसर की देखभाल के लिए व्यावहारिक और रोगी-केंद्रित है। इसका उद्देश्य निम्न-मध्यम आय वाले देशों (एलएमआईसी) में सस्ती और बेहतर कैंसर देखभाल तक सभी की पहुंच सुनिश्चित करना है। कॉन्क्लेव में ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) के साथ एक लाइव सर्जरी किया गया। इसके साथ कैंसर उपचार में महत्वपूर्ण कौशल को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने वाली 10 कार्यशालाएँ भी शामिल थीं।कॉन्क्लेव पर वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती ज्योति अग्रवाल ने बालको मेडिकल सेंटर के लिए अपना विचार साझा किया। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य कैंसर की देखभाल के लिए पूर्णरूप से रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण को अपनाते हुए इसके उपचार मानक को बढ़ाना है। यह कॉन्क्लेव रोगियों के लिए बेहतर उपचार प्राप्त करने के लिए सामूहिकता की शक्ति में हमारे विश्वास को दर्शाता है।ईकैंसर के मुख्य संपादक और यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो कैंसर सेंटर में ग्लोबल ऑन्कोलॉजी के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. एनरिके सोटो ने रोगी के दृष्टिकोण से ऑन्कोलॉजी पर पुनर्विचार करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक हितों पर ध्यान केंद्रित करना है इसके साथ ही स्पष्ट संचार की कमी रोगी और चिकित्सक दोनों के लिए उपचार संबंधी निर्णय लेने में बाधा बन रही है। हमारी प्राथमिकताओं को पुनः संतुलित करने के लिए शिक्षा, संचार, नीति, अनुसंधान डिजाइन और निवेश में बदलाव की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि हमें ऐसे समाधान अपनाने की आवश्यकता जो लागत-प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण हों। इससे निम्न-मध्यम आय वाले देशों में कैंसर उपचार पर वास्तविक प्रभाव डाला जा सकता है तथा इस पहल से सुनिश्चित हो पाएगा कि वित्तीय क्षमता की परवाह किए बिना कैंसर का इलाज आसान हो।
बालको मेडिकल सेंटर की चिकित्सा निदेशक डॉ. भावना सिरोही ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि हमारी चर्चाएँ अकादमिक शोधपत्रों तक सीमित नहीं है बल्कि दुनिया भर में कैंसर उपचार में सकारात्मक बदलाव लाएँ। इस वर्ष के सम्मेलन में चिकित्सक और नर्स के साथ-साथ शोधकर्ताओं, रोगी, कैंसर पीड़ित और विशेषज्ञ ने भी भाग लिया जिससे यह कैंसर चर्चाओं के लिए एक बहुआयामी मंच बना।टाटा मेमोरियल अस्पताल, मुंबई के उप निदेशक और कैंसर सर्जरी प्रमुख डॉ. शैलेश वी. श्रीखंडे ने बीएमसी की बेहतरीन सर्जरी विशेषज्ञता पर बात करते हुए कहा कि बीएमसी की सुविधाएं देश के प्रमुख कैंसर केंद्रों के बराबर है। यह इस क्षेत्र का अनूठा संस्था जिसके आठ कैंसर विशेषज्ञों में से पांच क्वालिफाइड एमसीएचस हैं। केंद्र के ऑपरेटिंग थिएटर (ओटी) और ओवरऑल इन्फ्रास्ट्रक्चर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं जो बीएमसी को विश्व स्तरीय उपचार देने में सक्षम बनाता है।विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिनिधियों कॉन्क्लेव को मूल्यवान अंतर्दृष्टि और रणनीतियों के लिए अपने विचार व्यक्त किया। इससे कैंसर संबंधित संस्थानों में कैंसर उपचार में सुधार लाने के लिए एक अभियान की शुरुआत हुई। इस कॉन्क्लेव में पहली बार एक समर्पित नर्सिंग कॉन्क्लेव भी शामिल था जिसमें कैंसर देखभाल में नर्सों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया।बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव का यह दूसरा संस्करण एक ऐतिहासिक आयोजन बन गया है। कॉन्क्लेव में 1000 से अधिक चिकित्सक, नर्स, शोधकर्ता, रोगी, कैंसर सर्वाइवर और विशेषज्ञ एक साथ आए हैं जिससे पूरे भारत में कैंसर उपचार तक सभी की पहुंच के लिए ऑन्कोलॉजी क्षेत्र को बढ़ावा देने का एक मंच मिला।
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: पं० कमल तिवारी के श्रीमुख से आज होगा श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ
Sat, Sep 21, 2024
कोरबा - सच्चिदानंद भगवान बांकेबिहारीजी एवं राधा रानी की असीम कृपा और पूर्वजों के आशीर्वाद के फलस्वरूप आदिवासी भवन निहारिका , मधु स्वीट्स के पास - नया कांशी नगर कोरबा में स्व० डा० राजेन्द्र कुमार सोनी के पुण्य तिथि के निमित्त 21 सितम्बर से 29 सितम्बर तक पं० कमल तिवारी (उमरेली वाले) के मुखारविंद से संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ कथा आयोजित है। इसके मुख्य यजमान श्रीमति राही देवी कुमार सोनी और आचार्य पं० प्रकाश तिवारी होंगे। भागवताचार्य पं० कमल तिवारी ने चर्चा करते हुये अरविन्द तिवारी को बताया कि आज 21 सितम्बर शनिवार को भव्य कलशयात्रा पश्चात वेदी पूजन एवं भागवत महात्म्य के साथ कथा का शुभारंभ होगा। वहीं दूसरे दिन से प्रतिदिन की कथा का शुभारंभ दोपहर तीन बजे से होगा , जो हरि इच्छा तक चलेगी। कथा की अगली कड़ी में 22 सितम्बर रविवार को परीक्षित जन्म - पाण्डवों की कथा , 23 सितम्बर सोमवार को भरत चरित्र - सति चरित्र और ध्रुव चरित्र की कथा , 24 सितम्बर मंगलवार को प्रहलाद चरित्र और गजेंद्र मोक्ष की कथा , 25 सितम्बर बुधवार को वामन अवतार - श्री रामावतार एवं श्री कृष्णावतार की कथा , 26 सितम्बर गुरूवार को श्रीकृष्ण बाल लीला और गोवर्धन लीला की कथा , 27 सितम्बर शुक्रवार को कंस वध और रुखमणि मंगल की कथा , 28 सितम्बर शुक्रवार को सुदामा चरित्र - परीक्षित मोक्ष - चढ़ोत्तरी के साथ कथा विश्राम , 29 सितम्बर रविवार को तुलसी वर्षा - हवन - सहस्त्रधारा के साथ पूर्णाहुति का कार्यक्रम सम्पन्न होगा।कथा आयोजक ने इस लोक मंगलकारी कल्याणमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में सभी को सपरिवार , इष्टमित्रों सहित पधारकर कथा श्रवण कर पुण्य के भागी बनने की अपील की है।
: श्रीमद्भागवत कथा का बार बार पान करें - पं० दिनेश दुबे
Sat, Sep 21, 2024
जांजगीर चाम्पा - श्रीमद्भागवत भारतीय वाङ्मय का मुकुटमणि और सर्व वेदान्तों का सार है। अठारह पुराणों के उपवन में श्रीमद्भागवत कल्पतरु की भांति शोभायमान है। बारह स्कंध तथा अठारह हजार श्लोकों वाले यह पुराण ज्ञान का अक्षय भंडार तथा विद्धता की कसौटी है। यह जीव तभी तक अज्ञानवश इस संसारचक्र में भटकता है, जब तक क्षण भर के लिये भी कानों में इस शुकशास्त्र की कथा नहीं पड़ती। जिस प्रकार रस पेड़ ठी जड़ से लेकर शाखा तक व्याप्त रहता है , किंतु इस स्थिति में उसका आस्वादन नहीं किया जा सकता। वही रस जब अलग होकर फल के रूप में आता है तब सभी को प्रिय लगता है। भागवत वेदरूपी कल्पकृक्ष का परिपक्व फल है। शुकदेव रूपी शुक के मुख का संयोग होने से अमृत रस से परिपूर्ण है। यह रस ही रस है। इसमें ना छिलका है , ना गुठली। यह इसी लोक में सुलभ है। इसलिये जब तक शरीर में चेतना रहे तब तक बार-बार इसका पान करें। इसके पठन एवं श्रवण से भोग और मोक्ष सुलभ होने के साथ ही साथ भगवान के चरणकमलों की अविचल भक्ति भी सहज प्राप्त हो जाती है। मन की शुद्धि के लिये इससे बड़ा कोई अन्य साधन नहीं हैं , इसके श्रवण मात्र से हरि हृदय में आ विराजते हैं।
उक्त बातें ब्राह्मणपारा चाम्पा में गोलोकवासी श्रीमति आशा द्विवेदी की स्मृति में आयोजित संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस आज भागवताचार्य पं० दिनेश कुमार दुबे ( पुरगांव वाले) ने मुख्य यजमान श्रीमति श्वेता जयप्रकाश द्विवेदी सहित उपस्थित श्रोताओं को कथा श्रवण कराते हुये कही। आगे राजा परीक्षित की कथा का श्रवण कराते हुये भागवताचार्य ने कहा महाभारत युद्ध में कौरवों ने पांडवों के सारे पुत्रों का वध कर दिया था , तब उनका एकमात्र वंशधर अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहा था। पांडवों के पूरे वंश को खत्म करने के लिये कौरवों के साथी अश्वत्थामा ने उस गर्भस्थ बालक पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर दिया , तब भगवान श्रीकृष्ण ने उतरा के गर्भ में प्रवेश कर उस बालक की ब्रहस्त्र से रक्षा की। गर्भ में कठिन परीक्षा होने के कारण यही बालक परीक्षित के नाम से प्रसिद्ध हुये और आगे चलकर राजा हुये। पांडवों ने संसार त्याग करते समय इनका राज्याभिषेक किया था , इन्होंने नीति के अनुसार पुत्र के समान प्रजा का पालन किया। एक समय ये दिग्विजय करने को निकले तो वहां कुरुक्षेत्र में इन्होंने देखा एक आदमी बैल को मार रहा है। वह आदमी जो वास्तव में कलियुग था , उसको इन्होंने तलवार खींचकर आज्ञा दी की यदि तुझे अपना जीवन प्यारा है तो मेरे राज्य से बाहर हो जा। तब कलियुग ने डरकर हाथ जोड़कर पूछा कि महाराज समस्त संसार में आपका ही राज्य है फिर मै कहां जाकर रहूं। राजा ने पांच स्थान बताते हुये कहा जहां मदिरा , जुआ , जीव हिंसा , वैश्यागमन और सुवर्ण हो वहां जाकर रहो। एक बार राजा सुवर्ण का मुकुट पहनकर आखेट खेलने के लिये गये और शिकार करते हुये वे वन में भटकते हुये भूख-प्यास से व्याकुल होकर ऋषि शमीक के आश्रम में पहुंचे। ऋषि उस समय ध्यान में लीन थे , राजा ने उन्हें पुकारा तो भी ऋषि का उन पर ध्यान नहीं गया। राजा को लगा कि ऋषि शमीक ने जानबूझकर उनका अपमान किया है , गुस्से में एक मरे हुये सांप को तीर से उठाकर ऋषि के गले में डाल वे वहां से चले गये। बाद में पहुंचे ऋषि शमीक के तेजस्वी पुत्र श्रृंगी ऋषि को इसका पता लगा तो उन्होंने क्रोधित होकर राजा परीक्षित को सात दिन में तक्षक नाग से काटे जाने का श्राप दे दिया। कथा की अगली कड़ी में व्यासाचार्य ने वराह अवतार की कथा श्रवण कराते हुये कहा पुरातन समय में दैत्य हिरण्याक्ष ने जब पृथ्वी को ले जाकर समुद्र में छिपा दिया तब भगवान विष्णु वराह रूप में प्रकट हुये। भगवान विष्णु के इस रूप को देखकर सभी देवताओं व ऋषि-मुनियों ने उनकी स्तुति की। सबके आग्रह पर भगवान वराह ने पृथ्वी को ढूंढना प्रारंभ किया और अंतत: पृथ्वी का पता लगाकर समुद्र के अंदर जाकर अपने दांतों पर रखकर वे पृथ्वी को बाहर ले आये। जब हिरण्याक्ष दैत्य ने यह देखा तो उसने भगवान विष्णु के वराह रूप को युद्ध के लिये ललकारा। दोनों में भीषण युद्ध हुआ और अंत में भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध कर दिया। भागवताचार्य ने बताया कि का अर्थ है हिरण्य मतलब स्वर्ण और अक्ष मतलब आंखें। जिसकी आंखें दूसरे के धन पर लगी रहती हों , वो वही हिरण्याक्ष है। हिरण्याक्ष का वध करने के बाद भगवान वराह ने अपने खुरों से जल को स्तंभित कर उस पर पृथ्वी को स्थापित कर दिया। इसके पश्चात भगवान वराह अंतर्धान हो गये।