: आकर्षण की केंद्र बनी दुर्गा मां की मुस्कुराती जीवंत प्रतिमा
Tue, Oct 12, 2021
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टनरसिंहपुर -- इस शारदीय नवरात्रि के अवसर पर पूरे देश में साधना और भक्ति का माहौल है। जगह-जगह पंडाल लगे हैं और लोगों द्वारा मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना की जा रही है। इस नवरात्रि में इन दिनों मां दुर्गा की मुस्कुराती हुई जीवंत मूर्ति की तस्वीर और बीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है , जिसे सभी लोग अपने ही घरों में विराजित देवी मां की बताकर वाहवाही लूटने में लगे हुये हैं। सौम्य स्वरूप में साक्षात विराजित मां दुर्गा के बारे में पाठकों की जिज्ञासाओं को देखते हुये हमारी मीडिया टीम ने इसकी तहकीकात कर सच्चाई को सबके सामने उजागर करने का प्रयास किया है। बताते चलें कि देश भर में चर्चित वात्सल्य से भरी सौम्य मुस्कान बिखेरती सिंहवाहिनी देवी मां की यह मूर्ति मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर बरहटा गांव के गुप्ता मोहल्ला में विराजित हैं। करूणा बरसाती प्रतिमा को देखने से लगता है कि जैसे वो अभी बोल पड़ेंगी। सुंदर और मुस्कुराती हुई देवी मां के चेहरे में इतने मनमोहक भाव है कि जो भी दर्शन के लिये पहुंचता है , वह एक समय के लिये मां को देखते ही रहता है। मां की मुस्कुराती हुई जीवंत प्रतिमा का आकर्षण ही ऐसा है कि आसपास के जिलों से भी सैकड़ों किलोमीटर दूर से लोग इस देवी मां को देखने आ रहे हैं , यह गांव इस समय आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मूर्ति को देखकर लोग कलाकार के हुनर की भी जबरदस्त प्रशंसा कर रहे हैं। यहां आने वाले भक्तों की प्रतिमा के साथ सेल्फी लेने की होड़ मची हुई है। भक्तों का कहना है कि प्रतिमा को देखने के बाद उस पर से नजरें नहीं हटती। प्रतिमा से बरसती करुणा और मुस्कुराहट लोगों को अपनी ओर खींच रही है। आयोजक मंडल के सदस्यों का कहना है कि भक्तों की बढ़ती तादाद को सम्हालना मुश्किल हो रहा है , उन्होंने प्रशासन से इसमें मदद मांगी है। हालांकि उन्हें इस बात की खुशी भी है कि उनका छोटा सा गांव पूरे देश में मशहूर हो रहा है। इसे वे मां दुर्गा की कृपा मान रहे हैं , जिसके चलते यह छोटा सा गांव नवरात्रि के दौरान तीर्थ क्षेत्र में बदल गया है। इस जीवंत मूर्ति का निर्माण छिंदवाड़ा जिले के सिंगौड़ी के मूर्तिकार पवन प्रजापति पिता राजेंद्र ने किया है। मूर्तिकार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हमारे परिवार में यह काम वर्षो से होता आया है , हम कुछ नया बनाने की हमेशा सोचते हैं। मां की कृपा से हम इतना कमा लेते हैं कि हमारी साल भर की गुजर हो जाती है। देवी मां की इस मुस्कुराती हुई जीवंत प्रतिमा के निर्माण करने की प्रेरणा के बारे में पूछे जाने पर पवन ने कहा कि कोरोना में बहुत से लोगों ने अपनों को खो दिया है जिससे वे मायूस हैं। उनकी उदासी दूर करने के लिये देवी माता के मुस्कुराते हुये चेहरे वाली मूर्ति बनायी , जिसे देखकर लोग अपने गमों को कुछ भूल सकेंगे। सभी लोग खुश रहें और जीवन में आगे बढ़ें , इसी भावना के साथ माता रानी की यह मूर्ति बनायी है। मूर्तिकार पवन ने आगे बताया कि घर में मूर्ति बनाने का कार्य पुस्तैनी है जिससे उसे भी बचपन से मूर्तियां बनाने का शौक है। उसकी बनाई प्रतिमायें छिंदवाड़ा जिले के साथ ही नरसिंहपुर , होशंगाबाद , बैतूल , सिवनी जिले तक जाती हैं। नरसिंहपुर के बरहटा में देवी के जिस स्वरुप की प्रतिमायें तैयार कर दी है वैसी ही कुछ और प्रतिमायें दूसरे जिले में भी दी गई हैं। इस बार देवी की विभिन्न मुद्राओ-स्वरुप वाली करीब 35 प्रतिमायें तैयार की गई हैं। इसी तरह छिंदवाड़ा के पास सारना में माता के बाल स्वरूप की सुंदर प्रतिमा विराजित है जिसे देखने लोग पहुंच रहे हैं।
: चंडी देवी मंदिर में नवरात्रि की धूम बेला दू ला
Tue, Oct 12, 2021
विदित हो की जैजैपुर के अंतर्गत डिजिटल पंचायत बेला दू ला में प्रति वर्ष की इस साल भी 29वा वर्ष धूम धाम से नवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है जिसमे 123 लोगो ने मनोकामना ज्योति कलश की स्थापना की है जिसमे दूर दूर से लोगो के द्वारा माता चंडी के मंदिर में भिड़ देखने को मिल रहा है जिसमे हमारे कैमरा ने आपके लिए कुछ तस्वीर वर्चुअल रूप में दिखाने के लिए हेतु व्हाटशाप से भेजा गया है जिसमे लोग अपने मनोकामना के लिए पूजा अर्चना किया करते है जो अपने आप में एक तरह से अनुकरणीय तथा अनुदान है
: नवरात्र पर्व आसुरी प्रवृत्तियो से विजय प्राप्ति का पर्व -- झम्मन शास्त्री
Tue, Oct 12, 2021
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टरायपुर - डोगरगढ़ स्थित माँ भगवती बम्लेश्वरी देवी के पावन प्रांगण में शारदीय नवरात्र पर्व के पुण्यमय अवसर पर माँ वेद जननी गायत्री देवी आराधना एवं सहस्त्रार्चन समारोह आचार्य श्री पंडित झम्मन शास्त्री पीठपरिषद् राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेशाध्यक्ष छत्तीसगढ़ के पावन सानिध्य में वैदिक विद्वानों के द्वारा मंगलमय वातावरण में सम्पन्न हो रहा है l परम सिद्धि प्रदायक नवरात्र पर्व एवं देवी उपासना के रस रहस्यों के विषय में प्रकाश डालते हुये आचार्य झम्मन शास्त्री ने सत्संग संगोष्ठी में बताया कि जगत जननी की कृपा होने पर जगतपिता परमात्मा की सहजता पूर्वक प्रेमपूर्ण कृपा सुलभ हो जाता है l माँ भगवती अनन्त रूपों में प्रगट होकर भक्तों के कल्याण हेतु लीला करती है , आसुरी वृत्तियों का दमन कर संत , भक्त और सज्जनों की रक्षा करते हुये सनातन संस्कृति के संरक्षण हेतु पराक्रम पूर्वक युद्ध के मैदान में शुंभ , निशुंभ , मधुकैटभ , महिषासुर , चण्ड , मुण्ड जैसे महादानवों का संहार कर प्रेरणा देती है कि समाज में आध्यात्मिक दैवी शक्ति प्राप्त कर अन्याय , अधर्म , अनीति ,अधर्माचरण के विरोध मे सत्य ,धर्म , न्याय , नीति की स्थापना के लिये व्यूहरचना युक्त संघर्ष करना चाहिये , इसलिये नवरात्र पर्व में सात्विक उपासना के द्वारा शक्ति संचय करने की परम्परा है। आज वर्तमान में तमोगुण , तामसी प्रवृत्तियां बढ रही है ,जो असुरों के समान है जिससे अनैतिकता , अपराध , चोरी , हिंसा , व्याभिचार ,दुराचरण का ताण्डव नृत्य हो रहा है उसे रोकने हेतु प्राचीनकाल से ही माँ दुर्गा , महाकाली , महालक्ष्मी , महासरस्वती , दस महाविद्या , चौंसठ योगनी , बावन शक्ति पीठ, षोडश मातृका अन्नपूर्णा, शीतला,भद्रकाली, चंडिकादेवी आदि की उपासना कर दैवी सम्पदा प्राप्त करने का विधान है। ध्यान आराधना , पूजा, यज्ञ ,व्रत ,तप , दान तभी सफल होता है जब हम शास्त्रों मे बताये विधि नियमों का पालन करते हुये सात्विक भाव से समर्पण की भावना,श्रद्धा ,आस्था पूर्वक सर्वहित की भावना से प्रार्थना समर्पित करें l भक्ति , पूजा ,यज्ञ ,साधना प्रदर्शन का विषय ना बने ,अन्तः करण की पवित्रता के लिये भगवत प्राप्ति के लिये आत्मकल्याण , जन कल्याण की भावना से हिन्दुओं के प्रशस्त मान बिन्दुओं की रक्षा के लिये मठ मंदिरों की सुरक्षा , गौसंरक्षण , भारत की अखण्डता , समाज में सुख शांति , समृद्धि , एकता के लिये आराधना करने पर सम्पूर्ण अभीष्ट फल की प्राप्ति संभव है। आचार्य श्री ने बताया कि पूज्यपाद गुरुदेव भगवान शंकराचार्य महाभाग द्वारा घोषित भारत ,नेपाल ,भूटान , शीघ्र शुभ संकल्प की पूर्ति के लिये हिन्दू राष्ट्र घोषित हो। नित्य माँ के चरणों में प्रार्थना करते हुये समाज में अपने अपने क्षेत्र में साप्ताहिक सेवा प्रकल्प संचालित कर युवा पीढ़ी को आदित्य वाहिनी के सक्रिय सदस्यता अभियान से जोड़ने का कार्यकर पुण्य लाभ प्राप्त करें । नवरात्र पर्व मे मठ मंदिरो को जो हिन्दुओं के गढ़ है किला है उसे शिक्षा , रक्षा , सेवा , संस्कृति , धर्म और मोक्ष का केंद्र बनाकर वहां सामुहिक भजन , संकीर्तन , हनुमान चालीसा का पाठ , स्वाध्याय , साधना , सत्संग , संगोष्ठी के द्वारा भारतीय संस्कृति , सनातन परम्परा का प्रचार प्रसार करते हुये समाज को सुसंस्कृत , सुबुद्ध तथा स्वावलंबी बनाने का अभियान चलावें यही सर्वोत्तम नवरात्र पर्व की साधना की सफलता होगी।