: प्रकट से ज्यादा प्रबल होती हैं गुप्त नवरात्रि – अरविन्द तिवारी
Mon, Feb 12, 2024
(माघी गुप्त नवरात्रि विशेष)रायपुर – हिन्दू धर्म में माघ महीने का विशेष महत्व है। इस महीने पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि को भी बहुत ही खास माना जाता है। इस नवरात्रि में व्यक्ति ध्यान-साधना करके दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करते है। माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। गुप्त नवरात्रि खासतौर से तंत्र-मंत्र और सिद्धि-साधना आदि के लिये बहुत ही खास माना जाता है। मां दुर्गा की पूजा , भक्ति और सिद्ध शक्तियों की प्राप्ति के लिये नवरात्रि सबसे उत्तम दिन होते हैं। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुये अरविन्द तिवारी ने बताया कि पूरे वर्ष में चार नवरात्रि आती है जिसमें चैत्र और आश्विन मास के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमीं तक दो प्रकट नवरात्रि होते हैं , इसी तरह माघ और आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमीं तक दो गुप्त नवरात्रि होती है। गुप्त नवरात्रि भी प्रकट नवरात्रि की तरह ही सिद्धिदायक होती है , बल्कि ये प्रकट नवरात्रि से भी ज्यादा प्रबल होती है। गुप्त नवरात्रि को तंत्र-मंत्र साधना के लिये विशेष तौर पर जानी जाती है। कहा जाता है कि गुप्त नवरात्रि में की जाने वाली पूजा से कई कष्टों से मुक्ति मिलती है। ये नवरात्रि भी प्रकट नवरात्रियों की तरह नौ दिन ही मनायी जाती हैं। गुप्त नवरात्रियों में मां भगवती की पूजा की जाती है। इस गुप्त नवरात्रियों का महत्व चैत्र और शारदीय नवरात्रियों से ज्यादा होता है , क्योंकि गुप्त नवरात्रियों में मां दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होती हैं। गुप्त नवरात्र को खासतौर से तंत्र-मंत्र और सिद्धि-साधना आदि के लिये बहुत ही खास माना जाता है। इस दौरान व्यक्ति ध्यान-साधना करके दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करते है। इस नवरात्रि को करने में साधक को पूर्ण संयम और शुद्धता के साथ मां भगवती की आराधना करनी चाहिये। गुप्त नवरात्रि की पूजा के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरुपों के साथ-साथ दस महाविद्यियाओं की भी पूजा का विशेष महत्व है। ये दस महाविद्यायें मां काली , तारा देवी , त्रिपुर सुंदरी , भुवनेश्वरी , छिन्नमस्ता , त्रिपुर भैरवी , मां धूमावती , मां बगुलामुखी , मातंगी और कमला देवी हैं। इस दौरान मां की आराधना गुप्त रुप से की जाती है, इसलिये भी इन्हें गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। यह नवरात्र भी चैत्र और शारदीय नवरात्रियों की तरह मनाये जाते है। गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से साधुओं , तांत्रिकों द्वारा मां को प्रसन्न करने और तंत्र साधना की सिद्धि के लिये किया जाता है। मान्यतानुसार इस नवरात्रि की पूजा को गुप्त रखने से दोगुना फल मिलता है। गुप्त नवरात्रि का महत्व , प्रभाव और पूजा विधि बातने वाले ऋषियों में श्रृंगी ऋषि का नाम सबसे पहले लिया जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार एक बार एक महिला श्रृंगी ऋषि के पास पहुंचकर उनसे कहा कि मेरे पति दुर्व्यसनों से घिरे हुये हैं और इस कारण कोई धार्मिक कार्य , व्रत या अनुष्ठान नहीं कर पा रही हूं। ऐसे में क्या करूं कि मां शक्ति की कृपा मुझे प्राप्त हो और मुझे मेरे कष्टों से मुक्ति मिले। तब ऋषि ने महिला के कष्टों से मुक्ति पाने के लिये गुप्त नवरात्र में साधना करने के लिये कहा था। ऋषिवर ने गुप्त नवरात्र में साधना की विधि बताते हुये कहा कि इससे तुम्हारा सन्मार्ग की तरफ बढ़ेगा और तुम्हारा पारिवारिक जीवन खुशियों से भर जायेगा। गुप्त नवरात्रों के नौ दिनों में देवी के नौ स्वरुपों की पूजा की जाती है। मां दुर्गा के नौ स्वरुपों की पूजा नवरात्र के भिन्न-भिन्न दिन की जाती है। गुप्त नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस पाठ को करने से मां दुर्गा प्रसन्न होकर अपने भक्तों को मनोवांछित वरदान देती हैं। नवरात्रि में घर में लहसून , प्याज जैसे तामसिक चीजों का प्रयोग बिल्कुल भी नहीं करना चाहिये।घट स्थापना आज -हिन्दू पंचांग के अनुसार इस वर्ष माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत आज शनिवार 10 फरवरी 2024 से हो रही है. वहीं इसका समापन रविवार 18 फरवरी 2024 को होगा। इस नवरात्रि में माता के मंदिरों में यज्ञ , हवन सहित विभिन्न अनुष्ठान संपादित होंगे। गुप्त नवारात्र में सिद्धिकुंजि का स्तोत्र का पाठ करना बहुत लाभदायक होता है। इस दौरान देवी माँ के भक्त बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। वे लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं। गुप्त नवरात्र में माता की शक्ति पूजा एवं अराधना अधिक कठिन होती है इस पूजन में अखंड ज्योत प्रज्वलित की जाती है। सुबह एवं संध्या समय में देवी की पूजा अर्चना करना होती है। नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशति का पाठ किया जाता है। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन कर व्रत पूर्ण होता है। देवी पूजन में दुर्गा सप्तशती के पाठ का बहुत महत्व है। यथासंभव नवरात्र के नौ दिनों में प्रत्येक श्रद्धालु को दुर्गासप्तशती का पाठ करना चाहिये किन्तु किसी कारणवश यह संभव नहीं हो तो देवी के नवार्ण मंत्र का जप यथाशक्ति अवश्य करना चाहिये। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व का समापन पूर्णाहुति हवन एवं कन्याभोज कराकर किया जाना चाहिये। पूर्णाहुति हवन दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से किये जाने का विधान है किन्तु यदि यह संभव ना हो तो देवी के नवार्ण मंत्र , सिद्ध कुंजिका स्तोत्र अथवा दुर्गाअष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र से हवन संपन्न करना श्रेयस्कर रहता है।गुप्त नवरात्रि का महत्व -गुप्त नवरात्रि तंत्र साधना , जादू-टोना , वशीकरण आदि चीजों के लिये विशेष महत्व रखता है। इन दिनों तक मां दुर्गा की कठिन भक्ति और तपस्या की जाती है। खासकर निशा पूजा की रात्रि में तंत्र सिद्धि की जाती है। भक्ति और सेवा से प्रसन्न होकर मां दुर्लभ और अतुल्य शक्ति का वरदान देने के साथ ही सभी मनोरथ सिद्ध करती है।मां दुर्गा को प्रतिदिन लगने वाला भोग -प्रतिपदा को रोगमुक्त रहने के लिये प्रतिपदा तिथि के दिन मां शैलपुत्री को गाय के घी से बनी सफेद चीजों का भोग लगायें। द्वितीया तिथि को लंबी उम्र के लिये मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, चीनी और पंचामृत का भोग लगायें। तृतीया तिथि को दुख से मुक्ति के लिये मां चंद्रघंटा को दूध और उससे बनी चीजों का भोग लगायें। चतुर्थी तिथि को तेज बुद्धि और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने के लिये मां कुष्मांडा को मालपुये का भोग लगायें। पंचमी तिथि को स्वस्थ शरीर के लिये मां स्कंदमाता को केले का भोग लगायें। षष्ठी तिथि को आकर्षक व्यक्तित्व और सुंदरता पाने के लिये मां कात्यायनी को शहद का भोग लगायें। सप्तमी तिथि को संकटों से बचने के लिये मां कालरात्रि की पूजा में गुड़ का नैवेद्य अर्पित करें। अष्टमी तिथि को संतान संबंधी समस्या से छुटकारा पाने के लिये मां महागौरी को नारियल का भोग लगायें। नवमी तिथि को सुख-समृद्धि के लिये मां सिद्धिदात्री को हलवा, चना-पूरी, खीर आदि का भोग लगायें।
: पुलिस के प्रति अपराधियों के मन में डर और आम जनता में सम्मान हो - सीएम साय
Mon, Feb 12, 2024
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टरायपुर - पुलिस विभाग की छवि से ही सरकार की छवि बनती है। इसलिये पुलिस अधिकारी इसका विशेष ध्यान रखें और जिस विश्वास से जिम्मेदारी दी गई है उसका कड़ाई से पालन करें। अपराध , नशाखोरी और अवैध गतिविधियों पर हमारी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है। पुलिस निष्पक्ष और निर्विवाद तरीके से काम करे। अवैध शराब बिक्री, जुआ, सट्टा, अवैध उत्खनन पर कड़ी कार्रवाहई करें , अगर इसकी बार-बार शिकायत आई तो जिम्मेदारी जिले के पुलिस कप्तान की होगी। अपराधों पर लगाम नहीं लगी तो संबंधित जिले के पुलिस कप्तान पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जायेगी। पुलिस को लेकर अपराधियों के मन में डर और आम जनता के मन में सेना की तरह सम्मान होना चाहिये। पुलिस का व्यवहार अपराधियों के लिये कठोर और आमजनों के लिये उतना ही नम्र एवं मृदु होना चाहिये।
उक्त बातें छत्तीसगढ़ में नई सरकार बनने के बाद पुलिस विभाग की बड़ी बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर में आयोजित पुलिस महानिरीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों के सम्मेलन में कड़े निर्देश देते हुये कही। उन्होंने आगे कहा कि अवैध शराब , जुआ , सट्टा जैसी सामाजिक बुराईयां समाज को अंदर तक खोखला कर देती हैं। जब युवा इससे प्रभावित होते हैं तो यह सर्वाधिक चिंताजनक है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़ा निर्देश देते हुये कहा कि यदि आपराधिक गतिविधियों पर लगाम नहीं लगेगी तो ना केवल संबंधित जिले के पुलिस कप्तान बल्कि थाना स्तर के पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जायेगी।सीएम साय ने कहा कि पुलिस विभाग अनुशासित विभाग है , पुलिस अधिकारियों में यह अनुशासन दिखना चाहिये। जो अंततः अनुशासित और अपराध मुक्त समाज की स्थापना में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने पीएम मोदी की दंड से न्याय की ओर की संकल्पना को स्थापित करने के लिये किये जा रहे प्रयासों का जिक्र करते हुये कहा कि नये कानून समयबद्ध तरीके से लागू हाे , यह सुनिश्चित किया जाये। सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रदेश के माओवाद प्रभावित क्षेत्र में हमारे जवान कठिन परिस्थितियों में उनका डटकर मुकाबला कर रहे हैं।उन्होंने संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ सरकार हर मोर्चे पर पुलिसकर्मियों के साथ खड़ी है और उनके सुविधाओं में कोई कमी नहीं आने दी जायेगी।पुलिस के कल्याण के लिये सभी जरूरी कदम उठाये गये हैं। समय पर पदोन्नति, आवास, जरूरी अधोसंरचना सहित संसाधनों की आपूर्ति के लिये हमने व्यवस्थायें की है , इसे आगे भी जारी रखेंगे। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ शासन के वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट का उल्लेख करते हुये कहा कि इस बजट में पुलिस विभाग के लिये बड़ी राशि आवंटित की गई है , यह बजट कानून का राज स्थापित करने में निर्णायक साबित होगा।छग को शांति के टापू के रूप में करेंगे स्थापित - विजय शर्मासम्मेलन में उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सीएम विष्णुदेव साय सरकार के पहले बजट में गृह विभाग को काफी कुछ मिला है। पिछले वर्ष के बजट की तुलना में गृह विभाग के बजट में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस बजट में नक्सल ऑपरेशन में जाने वाले जवानों के लिये राशन का बैग और स्पाईक रेसिस्टेंट शूज का प्रावधान किया गया है . इससे अब नक्सल ऑपरेशन में जाने वाले जवानों को सुविधा होगी। पुलिस विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारियों की सुविधाओं में वृद्धि के लिये भी इस बजट में प्रावधान किये गये हैं। उन्होंने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री के हृदय में बड़े अधिकारी से लेकर आरक्षक तक के अधिकारी के लिये समान रूप से संवेदना है। हम सबका कर्तव्य है कि अपराध तो अपराधी को जल्द से जल्द पकड़ लें। डिप्टी सीएम शर्मा ने कहा कि समाज में वातावरण बने कि अपराध ही ना हो और इसी लक्ष्य के साथ अधिकारियों को अपने दायित्वों का पालन करना चाहिये। उन्होंने कहा कि पुलिस का कप्तान यह ठान ले कि जिले में अपराध ना हो, नशे का व्यापार ना हो तो वह बिल्कुल नहीं होगा। छत्तीसगढ़ शांति का टापू था , इसे हम फिर से शांति के टापू के रूप में स्थापित करेंगे। इस सम्मेलन में पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा ने स्वागत उद्बोधन दिया और पुलिस विभाग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की। सम्मेलन के अंत में ग्रुप फोटोग्राफी भी कराई गई। इस दौरान कृषि मंत्री राम विचार नेताम , विधायक अमर अग्रवाल , प्रबोध मिंज , मुख्य सचिव अमिताभ जैन , अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ , अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक हिमांशु गुप्ता , प्रदीप गुप्ता , एसआरपी कल्लुरी , विवेकानंद सिन्हा , अमित कुमार गुप्ता , मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद , राहुल भगत , डॉ. बसवराजू एस. सहित छत्तीसगढ़ के सभी रेंज के पुलिस महानिरीक्षक और सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक उपस्थित थे।
: नाचा एसोसिएशन सचिव की उपस्थिति में व्याख्यानमाला का आयोजन संपन्न
Mon, Feb 12, 2024
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टरायपुर - साहित्य एवं भाषा अध्ययनशाला, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के पाणिनि सभाकक्ष में एक दिवसीय व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता - श्रीमति मिनल मिश्रा सचिव नाचा एसोसिएशन, नार्थ अमेरिका रही। जिन्होंने अपने व्याख्यान में छतीसगढ़ी नाचा एसोसिएशन का परिचय देते हुये छत्तीसकोश एप की जानकारी दी। इस एप में छत्तीसगढ़ी की विभिन्न बोलियों को और बाल साहित्य को शामिल करने के प्रयास किया जा रहा है। साथ ही छत्तीसगढ़ी के विद्यार्थियों को इस एप से संबंधित कोई भी सुझाव एवं एप की समृद्धि के लिये आगे काम करने का प्रस्ताव रखा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये अध्यक्ष साहित्य एवं भाषा अध्ययनशाला प्रो शैल शर्मा ने छत्तीसगढ़ी भाषा एवं साहित्य की दिशा में इस प्रयास की सराहना की और विद्यार्थियों को अच्छा कार्य करने की सलाह दी। कार्यक्रम में साहित्य एवं भाषा अध्ययनशाला के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मघुलता बारा , डा. सोनल मिश्रा, डॉ. कुमुदनी घृतलहरे , डॉ. विभाषा मिश्रा , डॉ. मृणालिनी करमोकर , डॉ बरातु सहित विभाग के विद्यार्थियों अधिक संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन विभाग के शिक्षक डॉ. कौस्तुभ मणि द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर विभाग के द्वारा श्रीमति मीनल मिश्रा का छत्तीसगढ़ी पुतरी की माला और छत्तीसगढ़ी कला के प्रतीक चिन्ह तथा शॉल से सम्मान भी किया गया।