: ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी है मां कात्यायनी – अरविन्द तिवारी
Tue, Oct 8, 2024
नवरात्रि के छठवें दिन आज माँ दुर्गा के छठवें स्वरूप कात्यायनी की पूजा आराधना की जाती है। माँ को जो सच्चे मन से याद करता है उसके रोग , शोक , संताप , भय आदि सर्वथा विनष्ट हो जाते हैं। जन्म-जन्मांतर के पापों को विनष्ट करने के लिये माँ की शरणागत होकर उनकी पूजा-उपासना के लिये तत्पर होना चाहिये। नवरात्रि के छठवें दिवस के बारे में अरविन्द तिवारी ने बताया कि माँ की उत्पत्ति या प्राकट्य के बारे में वामन और स्कंदपुराण में अलग-अलग बातें बतायी गयी हैं। माँ पार्वती का जन्म महिषासुर का वध करने के लिये ऋषि कत्य के घर में हुआ था इसलिये यह देवी कात्यायनी कहलायी। इनकी पूजा आराधना करने से अद्भुत शक्ति का संचार होता है और दुश्मनों का संहार करने में ये सक्षम बनाती है। मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत चमकीला और भव्य है , तेजोमयी छवि भक्तों के हृदयों को सुख और शांति प्रदान करती है। इनका अस्त्र कमल व तलवार है। आज के दिन साधक का मन आज्ञा चक्र में अवस्थित होता है। यह वृहस्पति ग्रह का संचालन करती है। इनकी चार भुजायें हैं दाईं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा में है तथा नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में। मांँ के बायीं तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार है व नीचे वाले हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। इनका वाहन भी सिंह है। इनका स्वरूप भव्य एवं दिव्य है और ये स्वर्ण के समान चमकीली है। ब्रज की गोपियों ने भगवान कृष्ण को पति रुप में पाने के लिये कालिंदी यमुना के तट पर इन्हीं की पूजा अर्चना की थी इसलिये ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में भी प्रतिष्ठित है। मान्यता है कि मां कात्यायनी की पूजा करने से शादी में आ रही बाधा दूर होती है। जिन कन्याओं के विवाह में विलम्ब हो रहा है उन्हें आज के दिन हल्दी की गाँठ चढ़ाकर माँ कात्यायनी की पूजा अवश्य करनी चाहिये। इससे भगवान वृहस्पति प्रसन्न होकर विवाह का योग बनाते हैं और इससे उन्हें मनोवांछित वर की प्राप्ति होती है। माँ कात्यायनी का पसंदीदा रंग लाल है और इन्हें शहद का भोग बेहद पसंद है। इन्हें पीला फूल और पीले रंग का नैवेद्य अर्पित करना चाहिये। इनकी उपासना और आराधना से रोग , शोक , संताप , भय आदि सर्वथा विनष्ट हो जाते हैं एवं भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ , धर्म , काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग , शोक , संताप और भय के अलावा जन्म जन्मांतर के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं। नवरात्रि के छठवें दिन यानि आज दुर्गा सप्तशती के ग्यारहवें अध्याय का पाठ करना चाहिये। माँ कात्यायनी की पूजा करते समय “ॐ ऐं ह्रीं क्लीम चामुण्डायै विच्चै” अथवा “ॐ कात्यायनी देव्यै नमः” मंत्रों का उच्चारण करना चाहिये। नवरात्रि के छठवें दिन प्रसाद में मधु यानि शहद का प्रयोग करना चाहिये। देवी मां को प्रसन्न करने के लिये गुड का दान करना चाहिये और नारंगी रंग के कपड़ें पहनने चाहिये। मां कात्यायनी के विधिपूर्वक आराधना करने से कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है व मार्ग में आने वाली कठिनाइयों पर विजय प्राप्त होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता कात्यायनी की उपासना से भक्त को अपने आप आज्ञा चक्र जाग्रति की सिद्धियां मिल जाती हैं. साथ ही वह इस लोक में स्थित रहकर भी अलौकिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है।कौन है मां कात्यायनी ?कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे , उनके पुत्र ऋषि कात्य हुये। इसी कात्य गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुये। इन्होंने कई वर्षों तक भगवती पराम्बा की कठिन तपस्या के साथ उपासना की। उनकी इच्छा थी कि मां भगवती उनके घर पुत्री रूप में जन्म ले , उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली। उनकी इच्छानुसार मां भगवती ने आश्विन मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी के दिन उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसी कारण से ही इन्हें कात्यायनी कहा जाता है। कुछ समय पश्चात जब दानव महिषासुर का अत्याचार धरती पर बढ़ गया , तब भगवान ब्रह्मा , विष्णु , महेश तीनों ने अपने - अपने अंश का तेज देकर महिषासुर के विनाश के लिये एक देवी को उत्पन्न किया। मां कात्यायनी ने ही अत्याचारी राक्षस महिषाषुर का वध कर तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त कराया था। महिषासुर का वध करने वाली देवी मां कात्यायनी को महिषासुर मर्दनी के नाम से भी पुकारते हैं।
: बालको ने राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य को दिया बढ़ावा
Mon, Oct 7, 2024
*बालकोनगर, 04 अक्टूबर, 2024।* वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने राष्ट्रीय पोषण माह 2024 के अवसर पर समुदाय में बच्चों, किशोरों और माताओं के लिए अनेक कार्यक्रम आयोजित किये। इस साल की थीम ‘सभी के लिए पौष्टिक आहार’ के अनुरूप संतुलित एवं पोषणयुक्त आहार के महत्व को सुनिश्चित करते हुए पौष्टिक विकल्प को बढ़ावा दिया गया। जिला स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न सामुदायिक भागीदारों के सहयोग से पोषण जागरूकता अभियान को संचालित किया गया।
पोषण माह अभियान नंद घर, आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने पर केंद्रित था। विशेषज्ञों के नेतृत्व में पोषण जागरूकता सत्र और स्थानीय सामग्री का उपयोग करके स्वस्थ खान-पान को प्रोत्साहित करने के लिए सामुदायिक रेसिपी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। रेसिपी प्रशिक्षण में माताओं ने सरकार द्वारा प्रदान किए गए टेक होम राशन (टीएचआर) का उपयोग करके पौष्टिक भोजन तैयार करना सीखा। इसके साथ ही स्वास्थ्य शिविर में कुपोषण और एनीमिया को रोकने के लिए माताओं एवं बच्चों की जांच की गई। समय पर एनीमिया लक्षण की जानकारी से उचित उपचार संभव हुआ। सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए ‘पोषण की बातें, पुरुषों के साथ’ नामक पहल की शुरूआत की गई। इसमें घर के पुरुषों को बच्चों और परिवार के स्वास्थ्य तथा पोषण महत्व पर जानकारी प्रदान की गई।
समापन समारोह में सामूहिक प्रयास का जश्न मनाया गया। समुदाय में रोल मॉडल के रूप में काम कर रही माताओं को "चैंपियन माता" के रूप में सम्मानित किया गया। गर्भवती दम्पति के विशेष प्रशिक्षण सत्र में माता-पिता दोनों को अपने बच्चे के समग्र विकास में समान रूप से योगदान देने तथा गर्भावस्था और बचपन के दौरान आपसी सहयोग पर मार्गदर्शन दी गई। कंपनी ने अपने प्रयासों की प्रतिबद्धता को दिखाते हुए ‘पोषण टाक्स’ वीडियो की एक सीरीज शुरू की, जिसमें पोषण संबंधी प्रमुख विषयों को दिखाया जाएगा। अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के सहयोग से नंद घर में मिलेट शेक वितरण अभियान का शुभारंभ हुआ। इसके साथ ही एक मासिक ‘पोषण पत्रिका’ का शुभारंभ किया गया जिसमें चैंपियन माताओं की कहानियाँ और व्यावहारिक, पौष्टिक व्यंजन की जानकारी दी गई।
बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने कहा कि बालको का दृष्टिकोण एल्यूमिनियम उत्पादन से आगे सामुदायिक भलाई तक फैला हुआ है, कंपनी सभी के लिए उज्जवल एवं स्वस्थ भविष्य को बढ़ावा देने के लिए कटिबद्ध है। हमारा प्रयास है कि हर बच्चा आगे बढ़े और हर मां को वह देखभाल मिले जिसकी वह हकदार है। पोषण माह के दौरान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य का जश्न मनाना, स्वस्थ समुदायों के पोषण के प्रति हमारे प्रयासों को दर्शाता है। बालको प्रचालन के आसपास रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।महिला एवं बाल विकास विभाग, रायपुर के उप निदेशक श्री दिलदार सिंह मरावी ने सामुदायिक स्वास्थ्य एवं सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने में सरकार और उद्योग के बीच परस्पर सहयोग के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग में हम महिलाओं और बच्चों के पोषण स्वास्थ्य और सशक्तिकरण में सुधार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि बालको अपने परियोजना के माध्यम से ऐसे पहल को आगे बढ़ा रही हैं, जो पोषण जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर आधारित है।
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: बालको के विभिन्न पहल से सुरक्षित कार्यस्थल संस्कृति को मिल रहा बढ़ावा
Mon, Oct 7, 2024
*बालकोनगर, 02 अक्टूबर 2024।* वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के सहयोग से प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया। यह प्रशिक्षण कर्मचारियों को सीपीआर, सामान्य घाव की देखभाल और आपात स्थितियों के प्रबंधन सहित आवश्यक जीवन रक्षक कौशल सीखाने पर केंद्रित था। चिकित्सा विशेषज्ञों ने सत्र का नेतृत्व किया जिसमें विभिन्न विभाग के कर्मचारी और व्यावसायिक साझेदारो ने भाग लिया जिसमें लगभग 160 कर्मचारी शामिल हुए।
प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण के अलावा कंपनी ने कर्मचारियों के लिए सीपीआर और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रशिक्षण आयोजित किया। प्रशिक्षण को अनिवार्य रूप से जीवन रक्षक कौशल प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। कार्यक्रम आपात स्थितियों से निपटने के लिए प्रभावी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) करने पर ध्यान केंद्रित था। प्रशिक्षण का उद्देश्य सुरक्षा को बढ़ाना, आपात स्थिति में प्रतिक्रिया समय को कम करना और आपातकालीन स्थितियों के लिए तैयारी सुनिश्चित करना था जो सुरक्षित कार्यस्थल वातावरण में योगदान देता है।इसके अलावा दो दिवसीय हाइड्रोलिक्स प्रशिक्षण सत्र कार्बन विभाग के कर्मियों को सुरक्षित और कुशल संचालन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया। इस सत्र का नेतृत्व पार्कर हॅनिफ़िन कॉर्पोरेशन के श्री सुनील हाजिरनिस ने किया। हाइड्रोलिक्स को संभालने में उनका 35 से अधिक वर्षों का अनुभव हैं। विभाग के 20 कर्मचारियों ने प्रशिक्षण लिया। सुरक्षित कार्यस्थल की संकल्पना को सुनिश्चित करते हुए सभी ने हाइड्रोलिक्स संबंधित सुरक्षा की सभी बारीकियों को सीखा।बालको ने समुदाय की 60 से अधिक महिलाओं के लिए सड़क सुरक्षा कार्यशाला आयोजित किया। कार्यशाला सड़क के संकेतों को समझने एवं सीट-बेल्ट और हेलमेट के महत्व पर केंद्रित था। सत्र को प्रश्नोत्तरी समापन के साथ व्यावहारिक कौशल से लैस करते हुए प्रशिक्षण की प्रभावशीलता सुनिश्चित की गई।बालको की मासिक सुरक्षा अभियान ‘सुरक्षा संकल्प’ का आयोजन विभिन्न विभागों में किया गया। ‘वाहन सुरक्षा और ड्राइविंग’ पर आधारित कार्यक्रम का उद्देश्य कर्मचारियों और व्यावसायिक भागीदारों के बीच सुरक्षित ड्राइविंग प्रथाओं और उचित वाहन रखरखाव के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना है। कंपनी के जीरो हार्म की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए दैनिक संचालन में सुरक्षा प्रोटोकॉल के महत्व से अवगत कराया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सभी कर्मचारियों के बीच सुरक्षा जागरूकता बढ़ाना है जो सुरक्षित कार्यस्थल बनाए रखने के लिए बालको की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
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