: आदि शंकराचार्य महाभाग के दर्शन आज भी प्रासंगिक एवं सर्वोत्कृष्ट - डा० तोयनिधि
Sun, May 12, 2024
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टरायपुर - आदि शंकराचार्यजी ने अल्प अवधि में ही सनातन संस्कृति एवं वैदिक सार्वभौम सिद्धांत की स्थापना के लिये जो महान कार्य किया वह अत्यंत आश्चर्यजनक तथा श्लाघनीय है। आचार्यचरण ने मठाम्नायमहानुशासनम् की रचना कर अपने द्वारा प्रतिष्ठित चतुष्पीठ पर आसीन आचार्यों की महत्ता, उपयोगिता, कार्यक्षेत्र सीमा, सीमा का उल्लेख किया है। उनके शिष्य प्रशिष्यों के द्वारा आज भी आचार्य के सिद्धांतो का ही प्रतिपादन किया जाता है। चारों दिशाओं में शंकराचार्य की सुदीर्घ परंपरा अभी अविच्छिन्न रूप से चलते आने के बावजूद भी तथाकथित नामधारी शंकराचार्य के रूप में शासन प्रशासन के प्रश्रय से हमारी आचार्य परंपरा को कलंकित करने का षड्यंत्र हमारे ही इस भारतवर्ष में किया जा रहा है , जो अत्यंत दुखद है।
उक्त उद्गार श्रीसुदर्शन संस्थानम् , पुरी शंकराचार्य आश्रम रावाभांठा में आयोजित आदि शंकराचार्य जयंती के अवसर पर संस्कृत महाविद्यालय के आचार्य डॉ. तोयनिधी वैष्णव ने व्यक्त किया। उन्होंने आगे कहा कि चौबीस वर्ष की आयु से एकतीस वर्ष की आयु तक भगवद्पाद ने बौद्ध, कापालिकादि 89 मतों का निराकरण कर धर्म नियन्त्रित, पक्षपात विहीन, शोषण विनिर्मुक्त वैदिक शासनतंत्र की भारत में स्थापना की और भारत को अखण्ड भारत के रूप में प्रतिष्ठित किया। उन्होंने अनेक देव स्थानों की प्रतिष्ठा कर सनातन मान बिन्दुओं का संरक्षण किया। उन्होंने योगियों सन्यासियों और साधको के निवास और साधना के अनुरूप वन, पर्वत, सागर, तीर्थ, आश्रम, गिरी, पुरी, सरस्वती, और भारती इन दस भागो में अपने सन्यासी शिष्यों को शिक्षण संस्थानों के अनुसार विभक्त किया। इसी क्रम में इनके द्वारा प्रकाश, स्वरुप, आनंद और चैतन्य नामक चतुर्विध ब्रम्हचारी निर्धारित किया गया जो गूढ़ अर्थ को प्रकट करते है।उन्होंने देव विग्रह, उपासनापरक वेदवाणी को सार्थक सिद्ध किया, जीव ईश्वर को औपाधिक भेद सिद्ध कर अभेद अद्वैत सिद्धांत का प्रतिपादन किया , आत्मा को सच्चिदानंदस्वरुपब्रम्हरूपता बताकर मुक्ति मार्ग प्रशस्त किया। अंत में आचार्य वैष्णव ने कहा कि पुरीपीठ के पूर्वाचार्य एवं वर्तमान पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामी श्रीनिश्चलानंद सरस्वती जी महाराज के सिद्धांतो, विचारो एवं ग्रंथो में पूर्णतः शाङ्कर सिद्धान्त अनुस्यूत है। हमारे लिये यह अत्यंत गौरव का विषय हैं की पुरीपीठ के आचार्यचरण का मार्गदर्शन भारतवर्ष के निवासियों को सुलभ है। उनके द्वारा हिन्दूराष्ट्र का उद्घोष सर्वहित प्रद शासनतंत्र की स्थापना में सहायक होगा । जयंती के इस पावन अवसर पर हम उनके पदचिन्हो पर चलें यही जयंती मनाने की सार्थकता सिद्ध होगी। बताते चलें आज आदि शंकराचार्यजी की जयंती पर शंकराचार्य आश्रम में कार्यक्रम संपन्न हुआ। सर्वप्रथम आचार्य सुमन महाराज ने यजमानों को पार्थिव शिवलिंग का रूद्राभिषेक कराया। इसके पश्चात आदि शंकराचार्यजी के चित्र पर षोडशोपचार पूजन और सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। ब्याख्यान कार्यक्रम को पूर्व कमिश्नर जी०एस०मिश्रा और आनन्दवाहिनी श्रीमति सीमा तिवारी ने भी संबोधित किया। इस कार्यक्रम का सफल संचालन उत्तम शर्मा और आभार व्यक्त टीकाराम साहू ने किया। इस कार्यक्रम में संदीप पाण्डेय , जयप्रकाश द्विवेदी , सुनीता शर्मा, रविशंकर पांडेय , हीना पांडेय , रमेश शुक्ला , उषा शुक्ला , पार्षद संतोष साहू बिरगांव , परसराम साहू , हुमेश साहू सहित पीठ परिषद् , आदित्यवाहिनी - आनन्दवाहिनी के पदाधिकारी एवं सदस्य विशेष रूप से उपस्थित थे। इसी कड़ी में आज प्रदेश के राजनांदगांव , दुर्ग , बिलासपुर , जांजगीर चाम्पा , कोरबा , कवर्धा इत्यादि जिला इकाई में भी आदि शंकराचार्यजी की जयंती कार्यक्रम बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। उक्ताशय की जानकारी श्रीसुदर्शन संस्थानम् , पुरी शंकराचार्य आश्रम / मीडिया प्रभारी अरविन्द तिवारी ने दी।
: श्री सीमेंट लिमिटेड को फ्लाई ऐश की आपूर्ति के लिए बालको ने किया एमओयू
Sun, May 12, 2024
बालकोनगर, 11 मई, 2024।* भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने श्री सीमेंट लिमिटेड के साथ समझौता (एमओयू) किया है। यह साझेदारी कम कार्बन वाले सीमेंट का उत्पादन करने के लिए बालको द्वारा श्री सीमेंट तक फ्लाई ऐश भेजने की सुविधा देगी। समझौते में श्री सीमेंट को 90 हजार मीट्रिक टन फ्लाई ऐश की आपूर्ति किया जाना है। इससे सीमेंट उद्योग में फ्लाई ऐश के सस्टेनेबल उपयोग के लिए महत्वपूर्ण सहयोग तथा सर्कुलर इकोनॉमी में बढ़ोत्तरी होगी।फ्लाई ऐश थर्मल पावर उत्पादन का उप-उत्पाद है जिसमें विभिन्न उद्योगों में पुन: उपयोग की महत्वपूर्ण क्षमता है। सीमेंट निर्माण में फ्लाई ऐश का उपयोग करने से लगभग 500 किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन, 3.2 मिलियन गीगा जूल ऊर्जा और प्रति टन 250 लीटर पानी बचाया जा सकता है। इससे सीमेंट उद्योग के भीतर सस्टेनेबल तरीकों को अपनाने में योगदान मिला है। ऐसे उद्योगों में फ्लाई ऐश के प्रबंधन के लिए एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा मिला है।फ्लाई ऐश का उपयोग ईंट निर्माण, सड़क निर्माण, इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और कृषि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है। बालको के 'ट्रांसफार्म द प्लेनेट' की प्रतिबद्धता के अनुरूप कंपनी विभिन्न उद्योगों को फ्लाई ऐश की आपूर्ति कर रही है जिसमें ईंट एवं सीमेंट संयंत्र, सड़क तथा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और माईंस शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2024 में बालको ने इन क्षेत्रों को 4 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक फ्लाई ऐश की आपूर्ति की है। इस पहल से 141% राखड़ का उपयोग हमारे रिसोर्स एफिशिएंसी और एनवायरमेंटल सस्टेनेबिलिटी को अधिकतम करने की प्रतिबद्धता के अनुरूप है।बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने श्री सीमेंट के साथ हुए एमओयू पर कहा कि कंपनी में हम औद्योगिक अपशिष्टों में कमी लाने और अनेक नए प्रयोगों के जरिए उन्हें नागरिकों और पर्यावरण के लिए लाभकारी बनाने के उद्देश्य से बालको ने अपने प्रचालन में अत्याधुनिक तकनीकों को स्थान दिया है। हम उद्योगों में सस्टेनेबल व्यवसाय की बढ़ती मांग को पहचानते हैं। फ्लाई ऐश कई उद्योगों के लिए एक सस्टेनेबल रॉ मटेरियल के रूप में सामने आया है। रॉ मटेरियल के रूप में हमारे फ्लाई ऐश को पुनर्निर्देशित कर आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा। यह समझौता सस्टेनेबिलिटी के प्रति हमारी साझा जिम्मेदारी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।श्री सीमेंट लिमिटेड के मुख्य खरीद अधिकारी श्री संजय मेहता ने एमओयू के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए इसके पारस्परिक लाभ को बताया। उन्होंने कहा कि बालको के साथ साझेदारी सस्टेनेबल कार्यप्रणाली के प्रति हमारी प्रतिबद्धता के अनुरूप है। सीमेंट उत्पादन में फ्लाई ऐश का उपयोग सीमित रूप से उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम कर कार्बन उत्सर्जन में कटौती करता है तथा सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देता है। यह साझेदारी हमारे लिए वैकल्पिक रॉ मटेरियल की स्ठायी आपूर्ति के हमारे प्रयासों को बढ़ावा देगी। हमारा लक्ष्य भविष्य में ऐसे सहयोगात्मक प्रयासों का विस्तार करना है।
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: कल देश भर में आयोजित होगा आदि शंकराचार्यजी का प्राकट्य महोत्सव
Sat, May 11, 2024
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टरायपुर - भगवत्पाद आदि शंकराचार्यजी के 2531वें प्राकट्य महोत्सव के उपलक्ष्य में पीठ परिषद् , आदित्यवाहिनी - आनन्दवाहिनी द्वारा कल देश भर में पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ पुरीपीठाधीश्वर अनन्तश्री विभूषित श्रीमज्जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वतीजी महाभाग के मार्गदर्शन में सनातन संस्कृति संरक्षणार्थ , शिवार्चन रूद्राभिषेक , विचार गोष्ठी , सत्संग , वृक्षारोपण , फल वितरण , सहस्त्रार्चन पूजन आराधना , सुंदरकांड पाठ , श्री हनुमान चालीसा पाठ , भजन संध्या , गौ रक्षा , जलसंकट निवारण , हिंदुओं के प्रशस्त मानबिन्दुओं की रक्षा हेतु विविध कार्यक्रम आदि शंकराचार्यजी द्वारा संचालित अभियान की पूर्ति हेतु समायोजित है। आज आदि शंकराचार्यजी का प्राकट्य महोत्सव सभी इकाईयों में बड़े धूमधाम से मनाया जायेगा। पुरी शंकराचार्यजी के सानिध्य में कल रविवार को गुरू करतार पैलेस सिआली रोड पठानकोट में भव्यता के साथ आदि शंकराचार्यजी का प्राकट्य महोत्सव मनाया जायेगा , वहीं शाम पांच बजे उनके श्रीमुख से भक्तों को दिव्य सत्संग श्रवण सुलभ होगा। इसी कड़ी में पूर्वाम्नाय श्रीगोवर्द्धनमठ पुरीपीठाधीश्वर अनन्तश्री विभूषित श्रीमज्जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वतीजी महाभाग द्वारा संस्थापित प्रांतीय कार्यालय श्रीसुदर्शन संस्थानम् , पुरी शंकराचार्य आश्रम में भी आज प्रात: नौ बजे से वैदिक आचार्यों द्वारा रूद्राभिषेक एवं आराधना किया जायेगा। फिर पूर्वान्ह साढ़े ग्यारह बजे से आदि शंकराचार्यजी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर उद्बोधन होगा , जिसके मुख्य वक्ता के रूप में डा० तोयनिधि वैष्णव आचार्य एवं विभागाध्यक्ष सेवानिवृत्त शासकीय संस्कृत महाविद्यालय रायपुर होंगे। इस प्राकट्य महोत्सव में शामिल होने वाले सभी भक्तों के लिये आश्रम में प्रसाद की व्यवस्था रखी गई है। आश्रम में सभी कार्यक्रमों की समाप्ति के पश्चात पुरी शंकराचार्यजी द्वारा संस्थापित संगठन पीठ परिषद् , आदित्यवाहिनी - आनन्दवाहिनी के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा रावाभांठा में भी प्रसाद वितरण किया जायेगा। इसी तरह से आचार्य झम्मन शास्त्रीजी के सानिध्य में सुबह दस बजे से मारवाड़ी कुवां शिव मंदिर भाटापारा में रूद्राभिषेक, हनुमान चालीसा पाठ और शाम पांच बजे अटल बिहारी इंडोर आडिटोरियम पीजी कालेज ग्राउंड में दिव्य सत्संग सभा एवं संगोष्ठी कार्यक्रम आयोजित है। वहीं दुर्ग एवं जांजगीर-चांपा जिला इकाई में भी आदि शंकराचार्यजी के प्राकट्य महोत्सव पर सुंदरकांड पाठ / हनुमान चालीसा पाठ सहित विविध कार्यक्रम होंगे। श्रीसुदर्शन संस्थानम् पुरी शंकराचार्य आश्रम / मीडिया प्रभारी अरविन्द तिवारी ने बताया कि कालक्रम से विलुप्त ज्ञान-विज्ञान को प्रकट करना , विकृत ज्ञान-विज्ञान को विशुद्ध करना और सूत्रशैली में प्राप्त ज्ञान-विज्ञान को विशद करना तथा सनातन शास्त्रसम्मत व्यासपीठ और शासनतंत्र को प्रतिष्ठित कर उनमें सामञ्जस्य स्थापित करना और विशद करना शासनतन्त्र को करना भगवत्पाद श्रीशङ्कराचार्य के अवतार का मुख्य प्रयोजन है।