: हमारे भगवान जगत् बनाते हैं और स्वयं जगत् बनते भी हैं - पुरी शंकराचार्य
Thu, Apr 6, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टरायपुर - हमारे भगवान जगत् बनाने हैं और जगत् बनते भी हैं इसलिये राम , कृष्णादि के रूप में साक्षात अवतार भी लेते हैं। जबकि जिनके भगवान सिर्फ जगत् बनाते हैं स्वयं जगत् नहीं बन सकते उनका अवतार सम्भव नहीं हो सकता। हमारे भगवान निर्गुण , निराकार हैं तथा सगुण , निराकार और सगुण , साकार के रूप में भी अभिव्यक्त होते हैं। आकाश , वायु, तेज , जल और पृथ्वी पञ्चभूत हैं और शब्द , स्पर्श , रूप , रस और गन्ध गुणों से युक्त हैं। पृथ्वी पांच गुणों से, जल चार गुणों से , तेज तीन गुणों से , वायु दो गुणों से तथा आकाश सिर्फ एक गुण शब्द से युक्त है। शब्द , स्पर्श , रूप , रस और गन्ध गुणों से ही पञ्चभूतों की भौतिकता प्रगट होती है।
उक्त बातें पूर्वाम्नाय गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने अभनपुर के ब्लाक कालोनी मैदान में आयोजित धर्मसभा में शिष्यवृंदों को संबोधित करते हुये कही।दस दिवसीय प्रवास पर छग पहुंचे पुरी शंकराचार्यगौरतलब है कि हिन्दू राष्ट्र निर्माण के अंतर्गत राष्ट्रोत्कर्ष अभियान में श्रीगोवर्द्धनमठ पुरीपीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गरु शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामी निश्चलानन्द सरस्वतीजी महाभाग अपने दस दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास के प्रथम चरण में पुरी से रेलमार्ग द्वारा मंगलवार की सुबह राजधानी रायपुर रेलवे स्टेशन पहुँचे। यहां पहुंचने पर धर्मसंघ पीठपरिषद् , आदित्यवाहिनी , आनन्द वाहिनी संगठन तथा भक्तवृन्दों ने उनका भव्य स्वागत किया। स्वागत पश्चात पुरी शंकराचार्यजी यहां से अभनपुर प्रस्थान किये जहाँ आशुतोष अल्का भवन में अभनपुर वासियों ने आत्मीय स्वागत किया। सायं ब्लॉक मैदान अभनपुर में विशाल धर्मसभा आयोजित हुई जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं को शंकराचार्य के दिव्य वाणी से आध्यात्मिक संदेश प्राप्त हुआ। वहीं बुधवार प्रातः निवास स्थल पर हिन्दू राष्ट्र संगोष्ठी एवं दीक्षा का कार्यक्रम समाप्ति पश्चात महाराजश्री सड़क मार्ग से प्रांतीय कार्यालय श्री सुदर्शन संस्थानम् रावांभाठा रायपुर पहुँचे , जहाँ उनका 09 अप्रैल तक प्रवास रहेगा। शंकराचार्य आश्रम में प्रतिदिन प्रात:कालीन सत्र में संगोष्ठी आयोजित होगी जिसमें भक्तजनों के धर्म, राष्ट्र एवं ईश्वर से संबंधित जिज्ञासाओं का समाधान होगा तथा सायंकाल शंकराचार्यजी का आमभक्तों को दर्शन सुलभ रहेगा। इन दिनों में शंकराचार्य आश्रम पर प्रदेश के सभी अंचलों से संगठन के पदाधिकारी गण उपस्थित रहकर संगठन संचालन एवं विस्तार के संबंध में पूज्यश्री से आवश्यक मार्गदर्शन भी प्राप्त कर सकेंगे। प्रादेशिक प्रवास की अगली कड़ी में 09 अप्रैल को अपरान्ह रेलमार्ग से चाम्पा के लिये प्रस्थान करेंगे। सायं चाम्पा रेल्वे स्टेशन पहुँचने पर जिलेवासियों द्वारा भव्य स्वागत पश्चात सड़क मार्ग से कोरबा प्रस्थान करेंगे। कोरबा में घंटाघर चौक के समीप रामजानकी मंदिर परिसर में राजपूत क्षत्रिय भवन में निवास रहेगा। निवास स्थल पर ही 10 एवं 11 अप्रैल को पूर्वाह्न ग्यारह बजे से संगोष्ठी , दीक्षा आयोजित होगी वहीं 10 अप्रैल सायं चार बजे से निहारिका के समीप दशहरा मैदान में विशाल हिन्दू राष्ट्र धर्मसभा का आयोजन है। इस धर्मसभा में सभी सनातनियों को रामराज्य समन्वित एवं सनातन संस्कृति पर आधारित हिन्दू राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका का बोध होगा तथा इस पुनीत कार्य में अपनी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित कर संकल्प लेने का सुअवसर भी होगा। कोरबा में सभी कार्यक्रमो की समाप्ति पश्चात 11 अप्रैल को सायं लिंक एक्स्प्रेस से शंकराचार्यजी बिलासपुर पहुँचेंगे , जहाँ नया बस स्टैंड स्थित झूलेलाल भवन , तिफरा में निवास निर्धारित है। वहाँ 12 एवं 13 अप्रैल को प्रातः संगोष्ठी एवं 12 अप्रैल को सायं सीएमडी महाविद्यालय मैदान में विशाल धर्मसभा आयोजित है। पुरी शंकराचार्यजी 13 अप्रैल को रात्रि में रेलमार्ग से सतना होते हुये रीवाॅं प्रस्थान करेंगे। गौरतलब है कि जब से पुरी शंकराचार्यजी द्वारा भारत को हिन्दू राष्ट्र के रूप में उद्भाषित करने की घोषणा की है जिसके उपरांत उनके प्रवास कार्यक्रम में हिन्दू राष्ट्र निर्माण के संबंध में सभी सनातनियों के मन में उत्साह , उमंग संचारित है।
: आईपीएस रतन लाल डांगी ने दी महावीर जयंती की शुभकामनायें
Thu, Apr 6, 2023
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टरायपुर - वरिष्ठ आईपीएस एवं राज्य पुलिस अकादमी चंदखुरी के निदेशक रतन लाल डांगी ने जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर महावीर स्वामी की जयंती के अवसर पर आज प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनायें दी हैं। उन्होंने कहा कि महावीर स्वामी के अनुसार अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है। किसी के अस्तित्व को मिटाने की अपेक्षा उसे शांति से जीने दो और स्वयं भी शांति से जियो , इसी में सभी का कल्याण है। इस संसार में जितने भी जीव हैं उनके प्रति दया भावना रखों।
जिसके मन में सदैव धर्म रहता है और जो धर्म के मार्ग पर चलता है देवता भी उसे नमस्कार करते हैं। अहिंसा , तप और संयम ही धर्म है। क्षमा के बारे में महावीर स्वामी ने कहा कि सभी जीवों से मेरा मैत्री भाव है मुझे किसी से कोई बैर भाव नहीं है मेरे द्वारा किये गये अपराध की मैं क्षमा मांगता हूं और उनके द्वारा किये गये अपराधों को क्षमा करता हूं। इस तरह से उन्होंने क्षमा मांगना और क्षमा करना दोनों ही गुणों के बारे में बताया है। महावीर स्वामी के अनुसार सत्य ही सच्चा तत्व है जो सत्य को जान लेता है वह मृत्यु को भी तैरकर पार कर जाता है। अपरिग्रह अर्थात कोई भी वस्तु संचित ना करना , किसी के प्रति लोभ मोह ना रखना। जो व्यक्ति सजीव या निर्जीव वस्तुओं का संग्रह करता है या उसे करने की सम्मति देता है , उसे दुखों से छुटकारा प्राप्त नहीं होता है। महावीर की शिक्षायें आत्मा की आंतरिक सुंदरता, शक्ति और सामंजस्य को दर्शाती हैं। उन्होंने मानव जीवन की सर्वोच्चता का ज्ञान सिखाया और जीवन के सकारात्मक दृष्टिकोण के महत्व पर बल दिया। महावीर ने कहा - एक जीवित शरीर केवल अंगों और मांस का एकीकरण नहीं है बल्कि यह आत्मा का निवास है , जिसमें अनंत-ज्ञान , अनंत-दर्शन , अनंत-वीर्य और अनंत सुख निहित है। दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसा आप अपने साथ चाहते हैं। जिस प्रकार आप दुःख पसंद नहीं करते उसी तरह और लोग भी इसे पसंद नहीं करते। यह जानकर आपको उनके साथ वो नहीं करना चाहिये जो आप उन्हें अपने साथ नहीं करने देना चाहते। जियो और दूसरों को जीने दो , सभी प्राणियों को जीवन प्रिय है। तू जिसे मारना चाहता है , (जिसको कष्ट व पीड़ा पहुँचना चाहता है) वह अन्य कोई तेरे समान ही चेतना वाला प्राणी है , ऐसा समझ। वास्तव में वह तू ही है। ऐसा सत्य वचन बोलना चाहिये जो हित , मित और ग्राह्य हो अर्थात जो सुखद हो और दूसरों के लिये हानिकारक ना हो। यदि सत्य बोलने से किसी को चोट पहुँचने अथवा किसी की मृत्यु होने की संभावना हो तो चुप रहना बेहतर है। सभी प्रकार के व्यवहार में ईमानदार रहें। किसी को धोखा ना दें। दूसरों की संपत्ति को हड़पने अथवा हासिल करने के लिये अनैतिक साधनों का प्रयोग ना करें। अपने जीवनसाथी के अलावा किसी अन्य के साथ शारीरिक संबंध ना बनायें। जीवनसाथी के साथ संबंधों में संयम बरतें। अपनी आवश्यकता से अधिक धन संचय ना करें। आपका आवश्यकता से अधिक संग्रहित धन समाज के लिये है , इसे समाज के कल्याण के लिये अर्पित करें। यदि सोने और चाँदी के कैलाश पर्वत के समान असंख्य पर्वत भी मिल जाये तो भी लोभी मनुष्य को उससे संतोष नहीं होगा , क्योंकि इच्छायें आकाश के समान अनंत हैं। अतः अपनी इच्छाओं को नियंत्रित करें। सांसारिक सम्पदा के मोह से बचें। तुम बाहर में मित्रों को क्यों ढूँढते हो ? तुम स्वयं ही अपने मित्र हो और तुम स्वयं ही अपने शत्रु हो। सदाचार में प्रवृत आत्मा मित्र है और दुराचार में प्रवृत होने पर वही शत्रु है। आपकी आत्मा से परे कोई भी शत्रु नहीं है। असली शत्रु आपके भीतर रहते हैं वो शत्रु हैं क्रोध , घमंड , लालच , आसक्ति और नफरत। बाहरी दुश्मनों से लड़ने की अपेक्षा इन दुश्मनों से लड़ें। स्वयं पर विजय प्राप्त करना लाखों शत्रुओं पर विजय पाने से बेहतर है। सभी स्थितियों में समभाव रखें। सुख और दुख में , आनंद और कष्ट में एक समान रहें। प्रिय हो या अप्रिय , सब को समभाव से सहना चाहिये। याद रखें कि कर्मों से कोई पलायन नहीं है। कर्म अनंत जन्मों तक कर्त्ता का पीछा करते हैं। हमारी मन , वचन और काया की सभी क्रियायें ऐसी हों कि नये कर्मों को आकर्षित। जैन धर्म में भगवान अरिहन्त (केवली) और सिद्ध (मुक्त आत्मायें) को कहा जाता है। जैन धर्म इस ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति , निर्माण या रखरखाव के लिये जिम्मेदार किसी निर्माता ईश्वर या शक्ति की धारणा को खारिज करता है । यह जगत अनादि-अनंत है । कोई ईश्वर या परमात्मा नहीं है जो इस जगत को चलाता हो । यह जगत स्वयं संचालित है। उसी प्रकार जैन दर्शन कर्म को प्रकृति के मौलिक कण के रूप में मानता हैं । जिन्होंने कर्म क्षय कर केवल ज्ञान प्राप्त कर लिया है , उन्हें अरिहंत कहते है। तीर्थंकर विशेष अरिहन्त होते है जो 'तीर्थ' की रचना करते है , यानि की जो अन्य जीवों को मोक्ष-मार्ग दिखाते है। जैन दर्शन में व्यक्ति पूजा का कोई स्थान नहीं है। जैन धर्म के अनुसार मनुष्य साधारण रूप में जन्म लेता है , परंतु अपनी इंद्रिय संयम और आत्म विजय की साधना के बल पर हर व्यक्ति महान बन सकता है। वरिष्ठ आईपीएस डांगी ने कहा कि महावीर स्वामी के सिद्धांत और उपदेश आज भी प्रासंगिक हैं। उनके दिखाये रास्ते पर चलकर और दीन- दुखियों की सेवा कर सभी एक खुशहाल समाज के निर्माण कर सकते हैं।
: मानव सेवा मिशन ने सोनपुरी स्कूल के बच्चों के साथ मनाया अपना स्थापना दिवस
Thu, Apr 6, 2023
बालको संयत्र में कार्य करने वाले युवाओं की समाजसेवी संस्था मानव सेवा मिशन ने अपने स्थापना दिवस के अवसर पर सेवा कार्य अभियान के रूप में शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सोनपुरी में अध्ययनरत कक्षा 6वीं से 8वीं तक के विद्यार्थियों को चित्रकला की प्रतिभा को निखारने के लिये ड्राइंग बुक और कलर पेन्सिल के साथ ही जरुरी प्रमाणपत्रों को सहेज कर रखने के लिये फाइल प्रदान किया।
विद्यालय के शिक्षक कृष्ण कुमार चन्द्रा जी के माध्यम से विद्यालय में सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम विगत कई वर्षों से चलाया जा रहा है इसी कड़ी में आज मानव सेवा मिशन के द्वारा बच्चों को चित्रकला सिखने और ग्रामीण बच्चों के अंदर छिपे प्रतिभा को निखारने के लिये आवश्यक सामग्री प्रदान किया गया। जिससे बच्चे गर्मी की छुट्टियों में चित्रकारी के गुण सीख सकें।
स्थापना दिवस के कार्यक्रम में मानव सेवा मिशन के सक्रिय सदस्य केशव चन्द्रा,अमर पटेल,राजेश धीवर,अशोक पटेल,दिनेश पृथ्वीकर,कमलेश बोहरपी,लिलेश्वर शर्मा,मोहन चन्द्रा उपस्थित रहे। विद्यालय परिवार की ओर से प्रधानपाठक अरुण कुमार दुबे जी,शिक्षक कृष्ण कुमार चन्द्रा जी,डी.आर. कश्यप जी,वीणा ग्वाल जी,सुरुचि शर्मा जी,यशोदा गोंड जी ने उपस्थिति प्रदान की।
यहाँ बताना लाज़मी होगा की मानव सेवा मिशन की स्थापना 4 अप्रैल 2020 को कोरोना वैश्विक महामारी से लड़ रहे जरूरतमंद ग्रामीणों को राशन उपलब्ध कराने के लिये किया गया था, लॉक डाउन के समय जरूरतमंदों को सूखा राशन उपलब्ध हो सके उसके लिये लोगों ने तन,मन,धन से निस्वार्थ सहयोग किया, इस अभियान के तहत मानव सेवा मिशन ने दोनों लॉक डाउन में बालको एवं आसपास के लगभग 30 गांवो में 2000 पैकेट राशन और 50 क्विंटल चांवल का वितरण किया थाl लॉक डाउन के बाद भी सक्रिय सदस्यों के विचार से इस अभियान को आगे सेवा कार्य के रूप में जारी रखने का निर्णय लिया था जो आजतक अनवरत रूप से जारी है, इन तीन वर्षों में पहाड़ी कोरवा जनजाति के लोगों को विभिन्न प्रकार की सेवा उपलब्ध कराई गई जिसमें प्रमुख रूप से राशन वितरण, बच्चों एवं बड़ों को कपड़े, चप्पल, महिलाओं को साड़ी, बरसात के लिये छतरी, घर का छत ढंकने के लिये प्लास्टिक, सब्जी भाजी के बीज, फलदार पौधे, होली पर मिठाई, रंग, गुलाल, पिचकारी, दीपावली पर मिठाई, फटाके वितरित किये गयेl साथ ही पहाड़ी कोरवाओं को शिक्षा एवं स्व रोजगार के लिये लगातार प्रेरित करने का कार्य किया जाता रहा हैl
*ठंढ के दिनों में चलाया विशेष अभियान*
ठंढ से जरूरतमंद बेघर बेसहारा लोगों को राहत दिलाने के लिये मानव सेवा मिशन ने विशेष अभियान चलाया जिसके अंतर्गत 5 चरणों में लगभग 500 कंबल का वितरण किया गया, इस अभियान के तहत कोरबा शहर के बेघर, बेसहारा, घुमन्तु लोगों को कंबल वितरण किया गया साथ ही जंगलों में निवासरत कोरवा और बिरहोर जनजाति के लोगों को कंबल वितरण के अलावा कुष्ठ परिवारों को भी कंबल वितरण किया गयाl इन सब सेवा कार्यों के अलावा अति जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक रूप से भी सहयोग किया गया जा रहा है जिसके अंतर्गत मुखिया विहीन परिवार की बेटियों को शादी के लिये आर्थिक सहयोग, परिवार के मुखिया का दुर्घटना हो जाने पर इलाज के लिये साथ ही मुखिया के आकस्मिक निधन हो जाने पर परिवार को क्रियाकर्म के लिये आर्थिक सहायता प्रदान किया जाता हैl