: जैन मुनि आचार्य विद्यासागर महाराज पंचतत्व में विलीन
Mon, Feb 19, 2024
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टरायपुर - जैन मुनि आचार्य प्रवर विद्यासागर महाराज डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरी पर्वत पर आज पंचतत्व में विलीन हो गये। इससे पहले जैन मुनि ने शनिवार की देर रात्रि लगभग ढाई बजे सल्लेखना के माध्यम से समाधि (देह त्याग) प्राप्त की थी। बताते चलें सल्लेखना एक जैन धार्मिक प्रथा है जिसमें आध्यात्मिक शुद्धि के लिये स्वैच्छिक आमरण उपवास शामिल है , यह स्वेच्छा से मृत्यु तक उपवास करने की प्रथा है। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ स्थित चन्द्रगिरी तीर्थ पर उन्होंने अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार थे और लगभग छह महीने से डोंगरगढ़ के चंद्रगिरी में ही रूके हुये थे। आचार्यश्री ने विधिपूर्वक सल्लेखना धारण कर ली थी , उन्होंने पूर्ण जागृत अवस्था में आचार्य पद का त्याग कर तीन दिन का उपवास ग्रहण कर तीन दिन का अखण्ड मौन धारण करते हुये आहार और प्रत्याख्यान बंद कर दिया था। जैन मुनि के देह त्याग करने पर पूरे देश के जैन समाज मे शोक की लहर है। पूरे देश से हजारों की संख्या मे जैन समाज के लोग उनके अंतिम दर्शन करने के लिये चन्द्रगिरी तीर्थ स्थल डोंगरगढ पहुंचे हुये थे। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैन मुनि से मिलने डोगरगढ पहुचे थे। उनकी समाधि की सूचना पर प्रधानमंत्री सहित कई राजनेताओं ने शोक व्यक्त कर किया। सोशल मीडिया पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज का ब्रह्मलीन होना देश के लिये एक अपूरणीय क्षति है। लोगों में आध्यात्मिक जागृति के लिये उनके बहुमूल्य प्रयास सदैव स्मरण किये जायेंगे। वे जीवनपर्यंत गरीबी उन्मूलन के साथ-साथ समाज में स्वास्थ्य और शिक्षा को बढ़ावा देने में जुटे रहे। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे निरंतर उनका आशीर्वाद मिलता रहा।पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ के चंद्रगिरी जैन मंदिर में उनसे हुई भेंट मेरे लिये अविस्मरणीय रहेगी , तब आचार्य जी से मुझे भरपूर स्नेह और आशीष प्राप्त हुआ था। समाज के लिये उनका अप्रतिम योगदान देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा। उनकी संवेदनायें महाराज जी के असंख्य श्रद्धालुओं के साथ हैं।
छग में आधे दिन का राष्ट्रीय शोकछत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ट्वीट करते हुये लिखा - वर्तमान के वर्धमान कहे जाने वाले विश्व प्रसिद्ध दिगंबर जैन मुनि संत परंपरा के आचार्य विद्यासागर महाराज जी आज ब्रह्मलीन हो गये। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पवित्र आत्मा के सम्मान में आज आधे दिन का राजकीय शोक रखा गया है। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा तथा कोई राजकीय समारोह/कार्यक्रम आयोजित नहीं किये जायेंगे।
आचार्य का संक्षिप्त परिचय -आचार्य विद्यासागर महाराज का जन्म शरद पूर्णिमा के दिन 10 अक्टूबर 1946 को कर्नाटक के बेलगांव जिले के सदलगा में कन्नड़ बोलने वाले जैन परिवार में हुआ था। जिस घर में उनका जन्म हुआ था अब वह एक मंदिर और संग्रहालय बन चुका हैं। इनके पिता मल्लप्पा थे जो बाद में मुनि मल्लिसागर बने और उनकी माता श्रीमती थी जो बाद में आर्यिका समयमति बनी। उनके भाई अनंतनाथ , शांतिनाथ और महाबीर ने आचार्य विद्यासागर से दीक्षा ग्रहण की और मुनि योगसागर , मुनि समयसागर एवं मुनि उत्कृष्ट सागर कहलाये। आचार्य के बचपन का नाम विद्यासागर था और 30 जून 1968 में 22 साल की उम्र में उन्होंने दिगंबर साधु के रूप में शुरुआत की थी। उन्हें आचार्य की उपाधि वर्ष 1972 में मिली थी।ये संस्कृत , प्राकृत सहित विभिन्न भाषाओं हिन्दी , मराठी और कन्नड़ में विशेषज्ञ स्तर का ज्ञान रखते हैं। उन्होंने हिन्दी और संस्कृत के विशाल मात्रा में रचनाये की हैं। सौ से अधिक शोधार्थियों ने उनके कार्य का मास्टर्स और डॉक्ट्रेट के लिये अध्ययन किया है। उनके कार्य में निरंजना शतक, भावना शतक, परीषह जाया शतक, सुनीति शतक और शरमाना शतक शामिल हैं। उन्होंने काव्य मूक माटी की भी रचना की है। विभिन्न संस्थानों में यह स्नातकोत्तर के हिन्दी पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता है।आचार्य विद्यासागर जी कई धार्मिक कार्यों में प्रेरणास्रोत रहे हैं। इनके शिष्य मुनि क्षमासागर जी ने उन पर आत्मान्वेषी नामक जीवनी लिखी है। इस पुस्तक का अंग्रेज़ी अनुवाद भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित हो चुका है। मुनि प्रणम्यसागरज ने उनके जीवन पर अनासक्त महायोगी नामक काव्य की रचना की है। आचार्य विद्यासागर छात्रवृत्ति, आत्मसंयम और कई घंटों तक गहन चिंतन के लिये जाने जाते थे। हालांकि उनका जन्म कर्नाटक में हुआ था, लेकिन उन्होंने आध्यात्मिक शिक्षा राजस्थान में ग्रहण की और अपना ज्यादातर समय बुंदेलखंड क्षेत्र में व्यतीत किया। इस क्षेत्र में शिक्षा और धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का श्रेय आचार्य विद्यासागर जी महाराज को जाता है। इन्होंने हाइकु कवितायें और महाकाव्य हिंदी कविता मुकामति भी लिखी है। ये नमक, चीनी, दूध, घी, तेल और जैन धर्म में पारंपरिक रूप से प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों जैसे आलू व प्याज आदि का सेवन नहीं करते हैं। वे एक समय भोजन करते थे और जमीन पर या लकड़ी के तख्त पर बिना गद्दा या तकिया के ही शयन करते थे।अगले आचार्य होंगे समयसागरविगत दिवस 06 फरवरी मंगलवार को दोपहर में मुनिराजों को अलग भेज कर निर्यापक श्रमण मुनिश्री योग सागर से चर्चा करते हुये आचार्यश्री विद्यासागर ने संघ संबंधी कार्यों से निवृत्ति ले ली थी और उसी दिन आचार्य पद का त्याग कर दिया था। उन्होंने आचार्य पद के योग्य प्रथम मुनि शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि समयसागर महाराज को योग्य समझा और तभी उन्हें आचार्य पद दिया जावे ऐसी घोषणा कर दी थी।
: स्वयं को अधिकारी बताकर लाखों की ठगी करने के तीन आरोपी जेल दाखिल
Sun, Feb 18, 2024
अरविन्द तिवारी की रिपोर्टअम्बिकापुर - मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर योजनाबद्ध तरीके से स्वयं को केन्द्र सरकार की योजना के अधिकारी बताकर संभाग सहित विभिन्न राज्यों के भोले - भाले ग्रामीणों से ठगी करने वाले तीन आरोपियों को सरगुजा पुलिस ने गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया , जहां से उन्हें न्यायिक रिमाण्ड पर जेल भेज दिया गया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुपलेश कुमार ने इस मामले का खुलासा करते हुये बताया सरगुजा पुलिस को मुखबिर द्वारा गंगापुर में तीन संदिग्ध अज्ञात व्यक्तियों के बिना नम्बर की मोटरसाईकल में घूमने की सूचना मिली। सूचना पर साईबर सेल, स्पेशल टीम तत्काल गंगापुर जाकर घेराबंदी कर दो अपाचे मोटरसाईकल में घूम रहे तीनो संदेहियों को रोककर पूछताछ किया गया।मौके पर जिला - सरगुजा, अम्बिकापुर में आने का स्पष्ट प्रयोजन नहीं बता पाने से संदेह के आधार पर विस्तृत पूछताछ हेतु उन्हें थाना लाया गया। जहां पूछ-ताछ दौरान तीनों आरोपीगण योजनाबद्ध तरीके से ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मार्णाधीन मकान में जाकर आवास योजना अंतर्गत स्वयं को पर्यवेक्षण अधिकारी बताकर मकान निर्माण कार्य में अनियमितता एवं देरी से निर्माण का हवाला देते हुये उनसे बीस - तीस हजार रूपये की ठगी कर लेते थे। ठगी के दौरान विश्वास दिलाने हेतु आरोपीगण ग्रामीणों को हाथ में नगदी रकम के साथ अपने पास रखे टैबलेट कम्प्यूटर में उनकी फोटो भी लिया करते थे। आरोपियों ने सरगुजा जिले में बतौली एवं रघुनाथपुर थाना क्षेत्रातंर्गत ग्रामीणों से ठगी करना स्वीकार किया एवं अपने पास रखे टैबलेट कम्प्यूटर में उनका फोटो भी दिखाया और उनके पास से ठगी की गई 24000 रूपये नगद राशि एवं उनके बैंक खातों में करीब 60000 धोखाधड़ी की राशि जमा करना स्वीकार किया। आरोपियों ने बताया कि विगत एक वर्ष में वे धनबाद , रांची , गुमला , बोकारो , जशपुर , पत्थलगांव में घूम - घूमकर करीब 150 ग्रामीणों को ठगी का शिकार बना चुके हैं , जिसमें उन्होंने अनुमानित लगभग तीस लाख रूपये से भी अधिक राशि की ठगी करना स्वीकार किया है। आरोपियों के विरूद्ध चौकी रघुनाथपुर में प्रार्थी तिलक केरकेट्टा निवासी पहाड़पारा ग्राम कोट के 25000 रूपये की ठगी की रिपोर्ट पर अपराध क्र- 31/2024 धारा 420, 34, भादवि. तथा थाना बतौली की प्रार्थिया केलाजो कुजुर निवासी सुआरपारा बतौली की रिपोर्ट पर अपराध क्र-16/2024 धारा 420, 34, भादवि. के तहत विधिवत कार्यवाही करते हुये पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया , जहां से उन्हें न्यायिक रिमाण्ड पर जेल भेज दिया गया।वहीं आरोपियों के बैंक खातो में जमा राशि हेतु संबंधित बैंक से संपर्क कर फ्रिज कराने हेतु पत्राचार भी किया गया है। उक्त कार्यवाही में प्रधान आरक्षक भोजराज पासवान , आरक्षक अनुज जायसवाल, अशोक यादव, जितेश साहू, मनीष सिंह, विकाश सिंह, संजीव चौबे, सुयश पैकरा का सराहनीय योगदान रहा।गिरफ्तार आरोपीगण -रोहित तिवारी पिता स्व. रामजी तिवारी उम्र 25 वर्ष निवासी गंगापुर तिवारी टोला मनियर बलिया उत्तरप्रदेश, कृष्णा कुमार पाण्डेय पिता जवाहिर पाण्डेय उम्र 35 वर्ष निवासी बीरामाटी थाना पकड़ी जिला बलिया उत्तरप्रदेश और गौतम पाण्डेय पिता हरेराम पाण्डेय उम्र 30 वर्ष बीरामाटी थाना पकड़ी जिला बलिया उत्तरप्रदेश।जप्ती -उक्त तीनो आरोपियों के कब्जे से 24000 नगद राशि , 02 नग अपाचे मोटरसाईकल , 03 नग मोबाईल , 01 नग टैबलेट कम्प्युटर और 02 नग एटीएम कार्ड।
: बालको ने संयंत्र और समुदाय में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह पर चलाया जागरूकता अभियान
Sat, Feb 17, 2024
बालकोनगर, 17 फरवरी, 2024। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने 'सड़क सुरक्षा हीरो बनें' थीम पर महीने भर का अभियान आयोजित करके 35वीं राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह मनाया। अभियान का उद्देश्य संयंत्र और समुदाय के लोगों के बीच सड़क सुरक्षा जागरूकता को बढ़ावा देना है, जिससे सभी सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण तैयार हो सके। 15 जनवरी से 14 फरवरी के बीच चले अभियान में लगभग 8000 व्यक्तियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। सभी प्रतिभागियों को जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से सड़क सुरक्षा के चैंपियन के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
बालको ने कर्मचारियों, उनके परिवारों और व्यावसायिक भागीदारों के बीच सुरक्षित ड्राइविंग और सड़क सुरक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए क्विज़, रैली, ड्राइंग और स्लोगन प्रतियोगिता सहित विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया। कंपनी ने सड़क सुरक्षा उपायों के महत्व को बताने के लिए जागरूकतापूर्ण नाटक और आपातकालीन अभ्यास का भी अभियान चलाया। व्यक्तियों के बीच सुरक्षित व्यवहार को प्रोत्साहित करने के लिए सर्वोत्तम पार्किंग और सुरक्षित ड्राइविंग जैसे विषयों पर प्रतियोगिता आयोजित की गईं। संयंत्र के साथ कंपनी ने छात्रों के बीच जागरूकता और जिम्मेदारी की संस्कृति को बढ़ावा देते हुए आसपास के स्कूलों में ज्ञानवर्धक सुरक्षा वार्ता और प्रश्नोत्तरी आयोजित किया गया।बालको ने अपने संयंत्र में रॉ मटेरियल और फिनिश्ड प्रोडक्ट के परिवहन के लिए भारी वाहनों का संचालन करने वाले 400 से अधिक ड्राइवरों के लिए नेत्र जांच और व्यापक स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया। सड़क सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करने के लिए संयंत्र परिसर में औचक वाहन निरीक्षण और संयंत्र के भीतर संभावित ब्लाइंड स्पॉट की पहचान कर उन्हें ठीक किया गया।बालको अपने संयंत्र क्षेत्र में बिना रूकावट यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए बालको पुलिस के सहयोग से एक हेल्पलाइन नंबर भी लॉन्च किया। 20 सुरक्षा कर्मियों की टीम द्वारा समर्थित यह सुविधा यातायात संबंधी किसी भी चिंता का तुरंत जवाब देगी। कंपनी ने कच्चे और तैयार माल का परिवहन करने वाले 270 से अधिक भारी वाहनों क्षमता के लिए पार्किंग सुविधा स्थापित की।बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री राजेश कुमार ने कहा कि हमारे संगठन के भीतर और बाहर सुरक्षा की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हम पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। सड़क सुरक्षा पर हमारे महीने भर चलने वाले अभियान का उद्देश्य सड़क उपयोगकर्ताओं को सड़कों पर सुरक्षित रूप से चलने के लिए व्यापक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल के साथ सशक्त बनाना है। सुरक्षा पर निरंतर जागरूकता और शैक्षिक पहल के माध्यम से हम अपने संयंत्र और समुदाय के भीतर एक सुरक्षित वातावरण बनाने के साथ सभी के बीच जिम्मेदारी और सम्मान की संस्कृति पैदा करने का प्रयास करने के लिए कटिबद्ध हैं।मजबूत सुरक्षा संस्कृति के निर्माण की दिशा में कंपनी ने अपने प्रचालन क्षेत्र में कई अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल किया है। एचएसएसई ने टी-पल्स निगरानी प्रणाली अपनाना जो सबसे व्यापक एआई मॉडल का उपयोग करके कैमरों के नेटवर्क के माध्यम से वास्तविक समय में संयंत्र के अंदर चल रही गतिविधि पर नज़र रखता है। ऑगमेंटेड एंड वर्चुअल रिएलिटी आधारित प्रशिक्षण केंद्र, वीडियो एनालिटिक्स, सस्टेनेबेलिटी मोबाइल ऐप और ई-लर्निंग पाठ्यक्रम जैसे डिजिटलीकरण के माध्यम से कर्मचारियों को सुरक्षा संस्कृति से जोड़ा गया है। बालको अत्याधुनिक सेंट्रलाइज्ड सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर (सीएसओसी) की मदद से यातायात एवं सड़क सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला सहित विभिन्न सुरक्षा कार्यों में बेहतर निर्णय लेने के लिए डिजिटल इंटेलिजेंस और डेटा अंतर्दृष्टि का लाभ उठा रहा है। रियल टाइम डेटा की निगरानी, हॉट स्पॉट डिटेक्शन सिस्टम जैसी परियोजनाओं सहित एंड-टू-एंड डिजिटल डैशबोर्ड की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए थर्मल निरीक्षण का उपयोग करना शामिल है। शॉप फ्लोर में भारी वाहनों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए एलईडी लोगो प्रोजेक्टर का प्रयोग हो रहा है। सड़क सुरक्षा को बढ़ाने के लिए आंतरिक वाहन संचालन में अत्याधुनिक एआई तकनीक एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (एडीएएस) और ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम (डीएमएस) को लागू किया गया है।
कंपनी ने रक्षात्मक ड्राइविंग पाठ्यक्रम, अग्नि सुरक्षा सत्र और सुरक्षा प्रोटोकॉल को दोहराने के लिए रेट्रो-रिफ्लेक्टिव साइनबोर्ड तैनात करने सहित कई सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यशालाओं के माध्यम से साल भर कर्मचारियों, उनके परिवारों और स्थानीय समुदाय को जागरूक करती है। सुरक्षा-प्रथम दृष्टिकोण को खूब सराहा गया जिसके लिए बालको को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए हैं जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा पुरस्कार (माइन्स), 5वीं सीआईआई राष्ट्रीय सुरक्षा अभ्यास प्रतियोगिता में प्लेटिनम पुरस्कार और ग्लोबल रोड सेफ्टी अवॉर्ड शामिल हैं।----------------------------------------------